सोमवार, 24 अक्तूबर 2011

साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को कसाब और अफ़ज़ल गुरू के साथ ही फ़ाँसी पर लटकाया जाना चाहिए ?

इंसान को इंसान की हत्या का हक होना ही नहीं चाहिये। ये काम सिर्फ़ भगवान का ही है। प्रज्ञा ने एक तो क्षत्रिय होते हुए ब्राह्मणत्व का स्वाँग किया। दूजे उन्होंने मालेगाँव में बम ब्लास्ट को अंजाम दिया। ऐसा सकारी इल्जाम है। यदि वे षडयंत्र में शामिल थीं तब लॉ ऑफ़ द लैंड के तहत उन पर कार्यवाही होनी ही चाहिये अदरवाइज़ । मोरओवर अफ़ज़ल गुरू वगैरह जरा कॉम्प्लीकेटेड मैटर हैं। आम लोगों की समझ के परे। रही बात गोड़से  नथूराम की तो वो भाईसाहब द्वारा की गई ब्लंडर का नतीजा हिंदूवादीज़ आर स्टिल सफ़रिंग। यार नत्थू, तुमने गाँधी की जगह जिन्ना को क्यों नहीं मार दिया ? ससुरा पाकिस्तान का झंझट ही ना मचता। एम आय राँग ?

गाँधीजी वॉज़ बहुत महान। उनके बारे में ऊलजलूल विचार लिखकर उन्हें कभी भी अपमानित ना होने देंना चाहिये।
......एक बात और

माता भवानी की आड़ में हमें हिंसा का झाड़ लगाने की ना तो हिमाकत करनी चाहिए और ना ही उनके नाम से किसी को डराना चाहिये। ये बहुत ही गन्दी हैबिट कहलाती है। आपसी मतभेद बातचीत वैचारिक चर्चाओं के बीच में भगवान से इस तरह रिलेशन दर्शाना जैसे वो इन्हीं के रिश्तेदार हैं और सामने वाले का उनसे कोई रिलेशन ही नहीं है। हा हा, ऐसे लोग बुद्दू कहलाते हैं। ए दुनिया वालों क्रोध, खून जलाने से अलावा और कुछ नहीं कर सकता, नीचे खड़े सॉरी अण्डर्स्टुड ? एक एक (दिवस) कीमती है भाई। इसका (रूप) एक दूसरे से (zealsy) जलन- और वाकयुद्ध में नहीं बिगाड़ना चाहिये, आय थिंक। हर समय खोंखियाये साँड की तरह दुनिया भर को लाल कपड़ा समझ कर उस पर फ़ालतू में भड़ास नहीं निकालते रहना चाहिये। ये कुछ ब्लॉग टिप्स हैं जो मैने सोचा आप सभी से शेयर कर लूँ, आँग्लभाषा के फ़्यूज़न के साथ में। हा हा। जय जय झपाट। 

18 टिप्‍पणियां:

बेनामी ने कहा…

ठीक कहा झपाटा जी,
मार पिटाई लड़ाई झगड़ा गाली गलौज एक दूसरे की जान के दुशमन बनना बहुत ही रद्दी काम है। ये बात लोगों को समझ में क्यों नहीं आती ? अच्छा किया आपने मॉडरेशन हटा दिया। अब कम से कम लोग आपसे डायरेक्ट बातचीत कर तो सकेंगे।

बेनामी ने कहा…

""किल्लर झपट्टा ""नाम से ही सर्कस का जोकर लगता हे @

nrendr ने कहा…

पता नही ये किल्लर झ्पाट्टा किसके कूर्मो का फल हे ?

मुनेन्द्र सोनी ने कहा…

इतनी जल्दी शरीफ़ बन गए किलिंग-विलिंग भूल गए? एक भी कमेंट किसी वास्तविक ब्लॉगर ने नहीं करा है ये देख कर समझ में आ रहा है कि तुम जैसे चिरकुट काले अंग्रेजों के वंशज क्या और कितना नाटक कर सकते हैं। क्या बात है भड़ासियों से पेट भर गया इतनी जल्दी? दूसरी पोस्ट लिख हमारे बारे में कि हम लोग कितने बुरे हैं, हँसू न.... हा हा हा हा हा हा
अबे चूतिये तूने ही सुअरपन करके हमसे कीचड़ कुश्ती शुरू करी थी अब समझा न कि हम किस तरह तेरी थूथनी को कीचड़ में घुसा कर तेरा दम घोंट सकते हैं अगर मन करे तो आगे भी जारी रख जैसा कुत्तापन तू इस पोस्ट में कर रहा है तेरे अंग्रेज बापों ने तुझे अंग्रेजी बोलना सिखा दिया बीच बीच में लेकिन वर्तनियाँ नहीं सिखायी हैं तो वो हम सिखा देंगे। दिवाली पर तेरे पिछवाड़े में कैसे सुतली बम घुसा घुसा कर आग लगाएंगे देखता चल, हम घोषित तौर पर बुरे, गंदे, गलीज़, जाहिल, अनपढ़, असभ्य लोग हैं लेकिन मुखौटा नहीं लगाते तेरे जैसे "शरीफ़" लोगों की तरह।
हा हा हा

किलर झपाटा ने कहा…

@ मुनेन्द्र सोनी

डोण्ट वरी मुन्नू सर, मैं खुद के साथ आपकी और भड़ासियों, सबकी वर्तनी सुधार दूँगा। और मुझे यदि ब्लॉगरों ने वास्तविक नाम से कमेंट कर दिये तो वो आप जैसे घोषित तौर पर बुरे, गंदे, गलीज़, जाहिल, अनपढ़, असभ्य लोगों की लिस्ट में नहीं आ जायेंगे क्या ? इसलिये वे मुखौटा लगाए रहते हैं मेरे जैसे सुसंस्कृत व्यक्ति की तरह, आपकी तरह नहीं, बुद्धू कहीं के। जिन ज़ील मैडम से आप सभी भड़ासियों का ...... भिड़ा है, (क्योंकि आप लोग भी उन्हें कुछ कहने पर ठीक उसी तरह फ़ड़फ़ड़ा रहे हो और गालियाँ दे रहे हो जैसे शोले का वीरू, हा हा) वो टकाटक गाँधी और भवानी माता पर पोस्ट लिख दें तब कुछ नहीं और मैंने तो वही बात आगे बढ़ाई अपनी अगली पोस्ट में, तो पढ़े बिना ही गरियाने लग पड़े। ठीक से पढ़ तो लो उसे पहले। हा हा। यही तो होता है जात बदलने का नतीजा। यू रंगा सियार। अब पुश्तों से काम रहा है सोने में ताँबे की मिलावट करके उसमें खोट डालने का और चले हैं साहित्यकारी पुरोहिताई करके औरों की वर्तनी सुधारने ! तभी तो घिनऊ किस्म की बातें करते हैं खुल-खुल कर। मुझे कीचड़ में घुसायेंगे, मुझे कुत्ता कहेंगे, मेरा दम घोंटेगे वाह वाह ! क्या बात है ! शरम भी नहीं आ रही है दीपावली के साफ़ सुथरे अवसर पर ये कीचड़ की उलीचा उलीच करेंगे। अच्छा है, लक्ष्मीजी भी आपको यही सब देंगी इस बार, तब समझ में आयेगा। बहुत हँसी आ रही है मगर मुन्नूजी, ये एक खिसियानी हँसी है जो आदमी उस पागलपन में हँसता है,जब वो सामने वाले का कुछ बिगाड़ नहीं पाता। सो कैरी ऑन विथ दिस खिसियाहट ऑन मी बिकॉज़ आय वोण्ड माइड इट। हा हा।

मुनेन्द्र सोनी ने कहा…

तुमसे किसने कह दिया कि भड़ासी लक्ष्मी से कुछ चाहते हैं ये चाहतें तो तुम जैसे कीड़ों की रहती हैं कि कहीं भेद न खुल जाए। "शरीफ़" आदमी अपनी शराफ़त दिखा रहा है चेहरे पर कंडोम लगा कर वो तो दुनिया देख पा रही है कि किस स्तर की शराफ़त है। हम बुरे लोगों को कोई तमन्ना नहीं है तेरे जैसा शरीफ़ बनने की। कौन हँस रहा है और कौन रो रहा है ये तो तुम महसूस कर ही रहे हो अंग्रेज के वर्णसंकर नस्ल के सुअर। हम तुम्हारी अंग्रेजी में घुरघुराहट को कीचड़ में दबाए रखे हैं तभी तुम बुलबुले छोड़ रहे हो। तू उपदेश दे रहा है हमें ठीक तरीके से पढ़ने के तो पहले तू देख कि तुझे कुत्ता नहीं लिखा है क्या लिखा है वो तू खुद पढ़ और बता कि क्या लिखा है तेरे जैसे वर्णसंकर को। हमने अपने पागलपन से कब इन्कार किया है हम सब पागल ही हैं अगर तुम जैसे लोग सामान्य हैं। क्या बात है मुम्बई आने का इरादा बदल दिया पहले तो बहुत बकरचुद्दई कर रहे थे क्या नवाब पहलवान का कबाब बन गया या पिछवाड़े में क्रांति हो गयी है तेरे?
जय जय भड़ास

किलर झपाटे की गाँड में एफिल टावर ने कहा…

अब किलकिलाहट इतनी आसानी से तो शाँत होने से रही तेरी क्योंकि गाँड में जब तक बड़ी बड़ी चीजें न जाएं तुझे मजा नहीं आता। अब खूब हंसियो कि भड़भड़ाए हुए विचारों की पूरी रेलगाड़ी अंदर घुस रही है जब तक तू नहीं सुधरता ऐसे ही शंटिंग जारी रहेगी।

شمس शम्स Shams ने कहा…

अबे ढक्कन ! तूने अब तक ये बताया नहीं कि तू बीच बीच में अंग्रेज कैसे बन जाता है क्या डी.एन.ए. में गड़बड़ी है तू वाकई गोरे और काले अंग्रेजों का "मिश्रित रूप" तो नहीं है?
जय जय भड़ास

एफ़िल टॉवर ने कहा…

सोच लो झाँटुओं, कि जब ये किलर झपाटा, मेरे जैसे लंबे चौड़े एफ़िल टॉवर को भी अपनी गाँड़ में डाल के रख सकता है तो उसका लंड कितना बड़ा होगा ? अबे चूतियों, जादा टें टें मत करो, क्योंकि वो जब तुममें से एक की गाँड़ में अपना लंड डालेगा तो तुम्हारे जैसे तीस चालीस हजार भड़ासियों की लाइन से गाँड़ मारते हुए मुनेन्द्र सोनी के मुँह से निकलता हुआ शम्स की गाँड़ में गैलनों से झड़ेगा। अबे लौड़ों, झपाटे के वीर्य की बाढ़ में तुम सबके कहाँ बह जाओगे पता भी नहीं चलेगा।

किलर झपाटा ने कहा…

चरम प्रिय मुन्नू मुनेन्द्र,
आप तो अब वास्तव में मानसिक असंतुलन की स्थिति में आ गये यार। बताओ फिर जात बदल डाली। ये सूअर वगैरह की कस कस कर कीचड़ में जाकर थूथनी वगैरह दबाने और दम घोंटाने का काम किनका होता है, आप तो जानते ही होंगे है ना ? अब बताइये आप, ये काम करने लगे सुनारी का काम छोड़कर ? मेरे चक्कर में आपके यदि इतने दुर्दिन आ गये हैं, तो आय एम वैरी सॉरी । आपकी माता जी की कसम मुझे बहुत दुख हुआ कि, इस चक्कर में आपकी जात के साथ साथ ब्लॉगिंग की साँसें भी उखड़ने लगीं। आपकी मिजाजपुरसी के लिये ही भड़ास पर आया था। ये तो मुझे आप से ही पता चल रहा है कि "आप चूतिये किस्म के लोग हैं जो दीवाली पर मुझ जैसे सुमुखौटाधारी वाराह के साथ गन्दे कीचड़ में होली खेल लेंगे"। ये बैड हैबिट है, दीवाली पर होली थोड़ी खेलते हैं। पटाखे वगैरह फोड़ते हैं अण्डर्स्टुड। इसीलिये तो मैने इस शुभ अवसर पर आप लोगों तशरीफ़ में ५०,००० वाली पटाखों की लड़ी लगा ही दी है। अब तो आप सब ज़ील एण्ड कम्पनी वाले, मजे से कई दिन फटफटाते रहेंगे विथाउट एनी प्रॉब्लम। हा हा।

एक बात कमाल की कही आपने कि, आपके किसी पुरखे के द्वारा मेरी मम्मी के मँगलसूत्र में मिलावट करने से मुझ जैसी संतति पैदा हुई। इसीलिये तो मना करते हैं मुन्नू, कि कभी भी किसी की मम्मी के मँगलसूत्र में अपने पुरखों को मिलावट नहीं करने देना चाहिये, वरना मुझ जैसी संतति पैदा हो गई तो आप जैसे स्वर्णकारों से अपना पिछवाड़ा रगड़ रगड़ कर धुलवाती रहेगी और अँग्रेजी मे दस्त कर कर के आप को लस्त कर देंगी। आपके हाथों में दस्त की खुशबदबू इतनी गहरे पैठ जायेगी कि भोजन करते वक्त ५६ प्रकार के मलों का आनंद देगी।

एक बात और बतलाइये यार, आप लोग मुझे खोजने पीटने के चक्कर में क्यों पड़े रहते हैं ? क्या मेरे शब्दों कि मार से आप सबका पेट नहीं भर पा रहा है, जो हाथ लात वगैरह मुझ पर चला कर जोर आजमाइश भी करना चाह रहे हैं। अरे रोज रोज ब्लड-प्रेशर और डायबिटीज की दवाई खाने वालों, मेरे पहलवानी झपाटे का वार क्या सहेंगे आप लोग ?

मुझे नंगे जैनों के हिमायती, बता रहे हैं आप। कितनी गन्दी बात है ये। सब जैन नंगे नहीं होते बेटे। सिर्फ़ उनके गुरूजी याने संत लोग जो कि सन्यासी होने के कारण रहते हैं बिना वस्त्रों के। आपकी जनरल नॉलेज कमजोर समझ में आ रही है जरा। और आप जो नंगाई करते हैं उसका क्या ? बुद्धू, वैरी नॉटी यू आर। क्या कहा आपने अंग्रेजी में हँस कर दिखाऊँ ? अरे इट्स वैरी सिंपल ! ये लीजिये Ha ha ha .......। यू कैन ऑलसो लॉफ़ लाइक दिस, बट यू डू नॉट हैव टाइम फ़्रॉम सिंपली फ़ाइटिंग विथ मी ऑन ब्लॉग एण्ड कमेंट्स। एम आय राँग ?
लक्ष्मी की पूजा को ढोंग बताने वाले और मुझे धूर्त कहने वालों को सबक सिखाने के लिये ही यह बात राज रखी गई है कि जब मैं भड़ास का सदस्य नहीं हूँ तो मेरा कमेंट बिना संचालकों की अनुमति के प्रकाशित कैसे हो गया। खुजाते रहिये मुन्नू बेट्टे अपना सर, यही पहेली बूझते बूझते कि या तो दोनों संचालकों में से कोई मुझे जानते हैं या फिर मैं भड़ास में घुसा कोई कोई रंगा सियार हूँ।

डॉ.दिव्या श्रीवास्तव के साथ आप लोगों के चिपकने-चिपचिपाने का परिणाम है ये, जो मैं आपको दिखा रहा हूँ, आप मुझे क्या दिखा पायेंगे ?
इट नीड्स औकात यार, विच यू ऑल डोण्ट हैव एट ऑल। एम आय राँग ? यू .......भाई-बहन के नाम पर कलंक्स।

हा हा हा हा हा हा....
जय जय झड़ास

मुनेन्द्र सोनी ने कहा…

ले डाली तुम्हारी इतनी कस कर कि बस होली-दीवाली,नंगों, जैनों सब में उलझ गए ऐसे ही इसी पोस्ट पर टिप्पणियाँ करते रहो जवाब देते हुए। हम खुश हैं कि तुम अब अपनी असल औकात पर आ चुके हो तुम्हारे मिश्र-मिश्रित चाहने वाले भी देख लेंग कि तुम्हारा क्या क्या कितना बड़ा और गहरा है
हा हा हा
हा हा हा
हा हा हा
तुम्हारी झड़ने की झड़ास की जय जय कार तुम्हारी पहलवानी का सबूत है कि तुम झड़ने के लिये ही परेशान रहते हो इसीलिये भड़ासियों से पेलवाए बिना नहीं माने तुम्हारी तमन्ना हमने पूरी कर दी है। मुंबई आने की बात टाल गए क्या बात है फट गयी क्या टोडी बच्चे? अपनी माँ के बारे में और उनके मंगलसूत्र में मिलावट की बात करके तो तुमने उन्हें भी लजा दिया होगा यदि हों तो एक बार उनसे जरूर पूछ लेना कि ब्लॉगिंग के चक्कर में उनके मंगलसूत्र को भी घसीट चुके हो। एफ़िल टावर अपने पिछवाड़े से निकाल लिया ये अच्छा करा वरना काफ़ी पर्यटक परेशान हो रहे होंगे। आगे क्या क्या कितना लम्बा मोटा बड़ा चौड़ा है ये आयाम बता कर काफ़ी पहलवानी करी है। तुम्हारे वीर्य की बाढ़ आएगी तो मैक्डोनाल्ड तेरे अंग्रेज उसका आमलेट बना कर तेरे जैसे पहलवानों को सप्लाई करा करेंगे वैसे तुम खुद भी खा लिया करना वैसे कब ऐसा करने वाले हो मुंबई आकर करो तो अच्छा रहेगा हम लोग भी देख लेंगे। कब आ रहे हो अगर फटी हुई सिलवा कर आना चाहो तो भी हम इंतजार कर लेंगे।
जय जय भड़ास

सोनी सुनार, टाटा लुहार, बाटा चमार.... ने कहा…

दुनिया भर में प्रसिद्ध ब्रांड सोनी(sony) भी इस हाइब्रिड नस्ल के मिलावटी मंगलसूत्र की पैदाइश सुअर को चमार मेहतर भंगी या ब्राह्मण या सुनार ही दिखेंगे। कर्मप्रधान इस देश में जातिवाद इन्हीं जैसे सुअरों की उपज है।

किलर झपाटा ने कहा…

प्यारे मुन्नू (कैप-एन-क्लोद्स न्यूड),
मुम्बई तो मैं आकर वापस हाँगकाँग लौट भी आया और फिर किसी भी दिन पहुँच जाऊँगा। आपके जैसे लोकल में लटक लटक कर थोड़ी चलता हूँ। हवाई जहाज में उड़ता हूँ, जिसे आप बचपन से आसमान की तरफ़ देखते और देखकर खुशी से उछल उछल कर शोर मचाते आये हैं, मगर आजकल ऊपर स्पॉण्डोलाइटिस की वजह से देख नहीं पा रहे हैं (आपकी फ़ोटो में आपकी टेढ़ी गर्दन देखकर आपके मित्र अमिताभ बच्चन जी की तरह मैने सही अनुमान लगा लिया)।
अण्डर्स्टुड। Ha ha..
देखो बच्चे अब आपकी यह क्रंदन-रुदन से रची-पगी खिसियाह्ट युक्त टिप्पणियाँ कोई दम नहीं रखती हैं। आप मुझसे बहुत परेशान और हलाकान हो चुके हैं और आपके शब्द वाण बोथरे साबित हो चुके हैं, ये आप भड़ास पर महसूस कर रहे होंगे। बेहतर है आप कुछ दिनों का मौन व्रत धारण करके अपनी झड़ी हुई शक्ति को दोबारा संचित करें। इस काम में मेरी तरफ़ से रुप्पू भैया याने कि डॉ. रूपेश आपकी आयुर्वेदिक मदद करेंगे ऐसी आशंकात्मक शुभकामनाओं के साथ।

मनूवादी ने कहा…

जातिवाद एक बहुत शानदार व्यवस्था थी। मगर ये किलर झपाटा नालयक, जातिवाद की हिमायत करता नजर नहीं आ रहा। इसने जाति की बात सिर्फ़ मुनेन्द्र की बात काटने के लिये कही है। ये भी पाजी और मुनेन्द्र महापाजी। अरे भड़ासियों तुम लोग काहे इस मुखौटाधारी पाजी के चक्कर में गर्त में गिरे जा रहे हो। छोड़ो इसको अपने हाल पे यार ये खुद ही चुप हो जायेगा। पूरा माहौल खराब कर रखा है ब्लाग का तुम लोगों ने।

डा.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) ने कहा…

आप मुंबई आए और चले भी गये कम से कम एक बार फोन तो करा होता शायद समय नहीं रहा होगा। मैं स्पॉंडिलायटिस ठीक कर सकता हूँ बशर्ते एक बार गर्दन हाथ में आ जाए। आपने अमिताभ बच्चन को हम भड़ासियों का मित्र माना ये गलत बात है हमारी उनसे कोई मित्रता नहीं है। लोकल ट्रेन में मैं भी चलता हूँ और इसमें अपराध बोध नहीं है। दोबारा आइयेगा तो जरूर मिलियेगा यदि मोबाइल में बैलेंस नहीं रहा हो तो ई-मेल करके आ जाते हैं हम मिलने आ जाते सहार एयरपोर्ट लोकल ट्रेन में बैठ कर हाँगकाँग से तो आप उधर ही उतरे होंगे क्योंकि पनवेल का इंटरनेशनल एयरपोर्ट अभी बन रहा है।
हममें से कोई भी आपसे जरा भी परेशान नहीं है बल्कि ऊर्जावान महसूस कर रहा है आप झड़ास की जय करते हैं और हम भड़ास की तो खुद ही सोचिये कि झड़ कौन रहा है:)
जय जय भड़ास

डा.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) ने कहा…

मनुवादी बन कर कमेंट कर लेने से बात खत्म नहीं हो जाती जब तक आप मान नहीं जातीं कि आप पाजी नहीं हैं। जातिवाद मनु के अनुसार नहीं है वह तो वर्णव्यवस्था है जो कि कर्म के आधार पर विभाजित थी कालांतर में कुटिल लोगों ने मनु को ही बुरा बना दिया। भड़ासियों का कोई स्तर नहीं है गर्त में गर्क होना ही हमारी नियति है। आत्महत्या करते खेतिहर किसान, बहुराष्ट्रीय कंपनियों में खून पिलाते मजदूर और अपने ही देश के धनिकों व नेताओं के हाथों पिस रहे आम आदमी की आवाज है भड़ास तो भला हमारा क्या स्तर?जमीन पर गिरा हुआ तो बस दफ़न हो सकता है तो ये मान लीजिये कि हम मुर्दे हैं जो कफ़न फाड़ कर चीख रहे हैं।
जय जय भड़ास

महेन्द्र श्रीवास्तव ने कहा…

सही है,इसमें गलत क्या है। बिल्कुल लटकाया जाना चाहिए

रणवीर डागर ने कहा…

अरे मूर्ख साध्वी और कसाब बराबर हैं क्या सादवी को तो जबरदस्ती फंसाया जा रहा है नीच कान्ग्रेसिओं के द्वारा