सोमवार, 17 अक्तूबर 2011

ज़ील (दिव्या) के ब्लॉग पर डरपोंक बनावटी देशभक्तों की कुश्ती ......किलर झपाटे के साथ


मेरे प्यारे दोस्तों,
आप सबको किलर झपाटे का सादर सप्रेम नमस्कार। आगे समाचार ये है कि परम आदरणीया मैडम दिव्या (ज़ील) के ब्लॉग पर पिछले दो दिनों से बहुत ही क्रोधी मगर अत्यंत डरपोंक किस्म के देशभक्त ब्लॉगरों का सम्मेलन चल रहा है। इनके ब्लॉग की ये विशेषता है कि यहाँ बहुत ही वाहियात किस्म के समसामयिक मुद्दे उठाए जाते हैं और उन पर एकतरफ़ा बहस ऑर्गेनाइज़ की जाती है। मजे की बात ये है कि, यदि आप इनके पक्ष में बोलें तो तत्काल आपकी टिप्पणी को तारीफ़ और प्रतिसाद मिलेगा। और यदि विपक्ष में बोलें तो लोग आपको ड्ण्डे मारने को तत्पर नजर आएंगे। बल्कि मारेंगे भी। अच्छा एक और बात है कि ये ज़ील मैडम जो कि दर‍असल एक मर्द हैं वे जबरन में औरत होने का स्वाँग रचे रहती हैं, ताकि लोगों पर अपने घड़ियाली आँसूओं का रौब डालकर उन्हें डरा सकें। अब गाहे बगाहे मैं भी अपने ब्लॉगरीय अधिकार के तहत इनके यहाँ चला गया और शिष्टाचारवश कोई टिप्प्णी कर दी तो समझिये कि बस हो गया हँगामा। मैं तो सबसे इज्जत से आप आप करके बात करता हूँ और इनके यहाँ के टिप्पणीकार मुझसे तू-तड़ाक करने लगते हैं। मैं उनकी बात का जवाब आप आप से ही देता हूँ, तो वे गाली गलौज तक करने लग जाते हैं। अब आप लोग तो जानते ही हैं कि मेरा तो दिल ही कुछ ऐसा है कि मैं किसी बात का बुरा नहीं मानता और रिप्लाई का रिप्लाई अदब के साथ देता ही जाता हूँ। उसमें ये मैडम ज़ील और उनकी टीम मुझसे इतना खुड़ जाते हैं कि मेरे बारे में खुद की टिप्पणीयाँ तो प्रकाशित करते जाते हैं और मेरा जवाब छापने पर इनकी हवा खिसक जाती है। एक कोई बहुत ही बड़े देशभक्त बेटे भी हैं भाई, मदर इंडिया बनी हुई जील मैडम के। अरे बापरे उनका गुस्सा नाक से बना है या नाक गुस्से से बनी है, यू काण्ट मेक आऊट। नाम है ईंजीनियर दिवस। मेरी बात का इन्हें जब कोई जवाब नहीं सूझता तो ये मगरमच्छ के आँसू बहुत सुन्दर ढंग से रोते हुए मम्मा ज़ील के पहलू में छुप जाते हैं और वहाँ से मॉडरेशन ऑन करवाकर उसकी आड़ में मुझे गरियाते हैं। गोइंग ग्रेट बेबी। और तो और जब इस पर भी बात नहीं बनती तो अचानक कहीं से डॉ. रूपेश श्रीवास्तव नामक सेक्स ब्लाईंड शख्स जो दर‍असल ज़ील ही हैं, मुझे ID वगैरह पहचानने की धमकी देते हुए बड़े ही दार्शनिक अंदाज में अपनी बेपेंदी की बकवास कर डरके मारे टिप्पणी मॉडरेशन के बिल में घुस जाते हैं। इनका नाम नए इतिहास में मॉडरेशन चूहा के नाम से मुतहरे अक्षरों में दर्ज किया जावेगा।
देखिए ज़ील के ब्लॉग पर मेरे साथ इस टिप्पणी घमासान के कुछ नमूने इसमें मेरी वे टिप्पणियाँ भी हैं जिन्हें इन भीरुओं ने भयवश छापने की हिम्मत ही नहीं दिखाई। हा हा। नाऊ एन्जाय योरसेल्फ़ मित्रों :-
Neeraj Rohilla said...
प्रशान्त भूषण ने जो भी कहा लोकतन्त्र के दायरे में रहकर कहा। उससे सहमत अथवा असहमत हुआ जा सकता है लेकिन केवल उस विचार से असहमति किसी को ये अधिकार नहीं देती कि आप खुले आम हिंसा पर उतर आयें। इस प्रकार की हिंसा की जिस प्रकार आपने अपने ब्लाग पर प्रशंसा की है चिंताजनक है। इस प्रकार की प्रवत्ति पर लगाम लगनी चाहिये, विरोध प्रकट करने के और भी तरीके हैं। आभार
Er. Diwas Dinesh Gaur said...
@नीरज रोहिल्ला
भाईसाहब कृपया उपदेश न दें, कोई और तरीका हो तो वह बताएं| हमे तो यही तरीका पता था सो इसका समर्थन करते हैं|
दूसरी बात, यदि कोई हमारे देश को तोड़ने की बात करे और हम चुपचाप सुनते रहें तो इससे बड़ी अनैतिकता क्या हो सकती है? क्या आपका यह वक्तव्य वीरता की श्रेणी में रखा जा सकता है?
जब स्वघोषित मसीहा टीम अन्ना का कोई सदस्य ऐसा बचकाना बयान देगा तो इसकी जिम्मेदारी अधिक होती है| जिसे उद्धारक समझा जा रहा है, जब वही देश तोड़ने की बात कहे तो बताइये जनता किस पर विश्वास करे? यह सरासर जनता के विश्वास पर वार है, इसकी सजा बहुत गंभीर होनी चाहिए|
मेरी पिछली टिपण्णी देखिये और बताइये कि क्या महारानाप्रताप भी गलत थे?
किलर झपाटा said...
प्रशांत-भूषण ने एकदम सही कहा है। आपको कुछ समझ वमझ में आता नहीं और लगीं हैं ऊटपटांग बातें करने। किसी को भी गद्दार वद्दार नहीं बोलना चाहिए एकदम से। दिस इज़ वैरी बैड ज़ील जी। और ये सबके सब ऊपर, जो आपके सुर में सुर मिला रहे हैं, गंदे विचारों वाले हैं ये लोग।
Er. Diwas Dinesh Gaur said...
@किलर झपाटा
भाई/बहन/Whatever, एक झपट्टा भूषण पर पड़ चूका है, इसे भूलना मत| देशद्रोही बयान देना तो गुनाह है ही, उसका समर्थन करना भी राष्ट्रद्रोह की श्रेणी में आता है| कश्मीर को भारत से अलग करने का बयान राष्ट्रद्रोही बयान है| इसमें क्या ठीक लगा आपको? क्या आप कश्मीर को भारत से तोडना चाहते है? यदि ऐसा है तो तू एक पाकिस्तानी है| हमारा देश क्यों सड़ा रहा है, जाकर घुस पाकिस्तान में|
अगर हमे समझ वमझ नहीं आता तो समझा दे| लेकिन देश को तोड़ने की बात मत कहना|
पहली बार मुखातिब होने का मौका मिला है| कितनी भी पहलवानी करता हो, बोलने से पहले सोच लेना चाहिए|
अभी के लिए इतना ही, आगे कुछ कहना हो तो इस परिपेक्ष्य को ध्यान में रख लेना|
किलर झपाटा said...
हमारा देश और इसके वासी मुग़ालता पालने में एकदम मास्टर हैं। भैया कश्मीर भारत का अभिन्न अंग बोलने भर से हो जाता है क्या ? ओय तथाकथित देशभक्तों। ये घर में चिटपिटी टिकली फोड़ने की जगह अनुच्छेद ३७० को तो पहले खत्म करा के बता दो। बात करते हो, हम राम सेना हैं हम फ़लानी सेना है। राम सेना के एक भी सैनिक के बराबर एक भी गुन नहीं है इन सभी में जो थपड़ा थपड़ी करते रहते हैं। जमानत होने के पहले जेल के बाहर और जेल में कितना पिटे होंगे जरा पूछ लेना उनसे। इनको कुन्दन कहते हैं आप और प्रशांत देशद्रोही। वाह वाह अच्छा डिफ़ाइन किए भैया। इसी किस्म की बेवकूफ़ियों ने देश को गुलाम बनाए रखा इतने दिनों। वोट डालते समय दोगे भ्रष्टों को और सच बोलने पर पीटोगे शिष्टों को। सुधार करना है तो इस किस्म की समस्याओं को जड़ से खत्म करने में दिमाग लगाओ। ये चनकटाई करने से कुछ बदलने वाला नहीं अण्डरस्टुड। जय हिन्द।
किलर झपाटा said...
जब जिन्ना, गाँधी, नेहरू, काँग्रेस और बरतानिया सरकार ने देश तोड़ा था, तब आपके दादा जी या नानाजी या और रिश्तेदारों ने क्या कर लिया था ? कुछ आप कर रहे हैं। चीन आँखें दिखा रहा है क्या कर पा रहे हैं, जरा बतलाइये तो ? मुझे पाकिस्तानी बतला रहे हैं आप। वैरी स्ट्रेंज। हा हा।  अभी आपकी हमारी मुलाकात नई नई है इंजीनियर साहब। जब ठीक से मिल लेंगे तब न चाहते हुए भी आप हमारे नियर आ जायेंगे। अरे ये पहलवान जब भी बोलता सोच-समझ कर ही बोलता है, मैन। बल्कि हम जो बोलता, पब्लिक उसी को सोचने लगता। एम आय राँग दोस्तों ? टैल दिस बेबी, दिवस। ही इज़ गैटिंग एंग्री ऑन मी !
shilpa mehta said...
@ किलर झपाटा जी
मैं आज दो तीन पोस्ट्स पर ( इसी विषय की ) एक ही बात लिख आई हूँ - कि जब प्रशांत भूषण जी स्वयं ही सब बातों के निर्णय "जनमत संग्रह" द्वारा ही कराना चाहते हैं - तो फिर उन्होंने जो कहा - उस पर उनके साथ अच्छा व्यवहार हो या बुरा - फूलों की मालाएं पहनाई जाएँ या जूतों की ? इस पर constitutional decision की ज़रुरत क्या है ?
जनमत संग्रह ही किया जाना चाहिए ना - कि उन जैसे बयान देने वालों के साथ क्या हो ? मुझे तो यही लगता है कि यदि ऐसा जनमत संग्रह किया जाए - तो उनके ही तरीके से उनका सही निर्णय हो जाएगा ... और यह कोई hung jury नहीं बल्कि clear cut रिजल्ट होगा - देख लीजियेगा !!!! किन्तु इसमें संविधान की आड़ ले कर छुपने का प्राविधान नहीं होना चाहिए !!! क्या आपको ऐसा नहीं लगता ?

Er. Diwas Dinesh Gaur said...
@किलर झपाटा
कश्मीर में धारा ३७० लागू है, जिन्ना, नेहरु, गांधी, कांग्रेस, ब्रिटेन ने देश तोडा था, चीन आँखें दिखा रहा है तो क्या इसका मतलब यह हो गया कि जब तक यह सब ठीक नहीं हो जाता तब तक देश तोड़क बयानबाजी कर टाइम पास करें? ठीक है, इन सबके लिए लड़ना चाहिए, लेकिन यह क्या मतलब हुआ कि तब तक देश को तोड़ने वाले बयानों का समर्थन करलो और इनका विरोध करने वालों को बेवकूफ समझ लो?
कुछ अक्ल है या पहलवानी करके मोथा हुआ जा रहा है? या फिर अक्ल बेच कर मक्खन खा रहा है?
@ किलर झपाटा ,
तुम कौन हो क्या हो ये तो तुम ही जानो लेकिन एक बात तुम्हारी जानकारी के लिये बता दूँ कि किसी भी देश को राष्ट्र बनने की स्थिति तक आने और ऐतिहासिक गलतियों को सुधारने में जितना समय लगता है उस लिहाज से पैंसठ साल तो शैशव काल है। हमारी सभ्यता हजारों साल पुरानी रही है उस सभ्यता और संस्कृति को संविधान तक लाने में समय लगेगा हम सब अपने अपने स्तर पर प्रयास कर रहे हैं तुमने अब तक क्या क्या करा है गिनाओ ताकि हम तुम्हारा धन्यवाद कर सकें राष्ट्रहित में ।
संजय कटारनवरे
मुंबई
जय जय भड़ास
किलर झपाटा said...
आदरणीय शिल्पा जी,
हमको तो बहुत कुछ लगता है, पर लगता है कि इन तथाकथित देशभक्तों को कुछ भी नहीं लगता है। जिस संविधान की बात आप कर रही हैं क्या वो सबको मान्य था उन दिनों, और या के अभी भी ? कितने हिन्दू अम्बेडकर के हिन्दू कोड बिल के खिलाफ़ थे? कर क्या पाए ये अहम विषय है। सक्सेशन एक्ट में किए गए बराबरी के अधिकार ने भाई-बहनों को एक दूसरे के खिलाफ़ कोर्ट कचहरी करा दिया। ४९८/ए ने न जाने कितने निर्दोष जेल में पहुँचा दिए। काहे दिखावे का ये करवा चौथ हो रहा है, आय काण्ट अण्डरस्टैंड। उल्लुओं के मानिंद हजारों एक्ट बना के रखे हैं देश भर में। क्या सब के सब भ्रष्टाचार की जड़ नहीं हैं। सुगम क्यों नहीं बना पाते हम सब चीज़ों को ? अड़ंगों से दौड़ जीती गई है,कभी भला ?

और ये इंजीनियर दिवस दिनेश गौर जी,
नमस्ते सर। इनको सामने वाले से अदब से बात करना तक तो आता नहीं ये देशप्रेम करेंगे। डोनेशन देके प्रायवेट कालेज से पास होकर यही इंजीनियर तो पुल पे पुल गिरा रहे हैं और बात करते हैं अक्ल की। आप सुबह उठकर दैनिक कार्यों से फ़ारिग होकर थोड़ा भगवान के सामने ध्यान वगैरह किया कीजिए सर, ये बात बात पर सुलगना अपने आप कम हो जाएगा। हा हा। जरा इतिहास वितिहास अच्छे से समझना पढ़ना सीखो यार, क्या है ये, हैं ? अरे कुछ नहीं तो जिसको बहुत पसंद करते हो आप लोग वो क्या नाम है ? हाँ गोड़से नथुराम। उसकी ही लिखी पुस्तक पढ़ लो-- "गाँधीवध क्यों ?" सारे ज्ञानचक्षु खुल जावेंगे, भाई।

अरे हाँ ये मराठी भाऊ मिस्टर संजय कटारनवरे जी तो रह ही गए। आय हाय क्या बात है कटारपति! बहुत उम्दा। अरे भाऊ एतिहासिक गलतियाँ आजतक कभी सुधरी हैं भला ? रावण को हर साल जला जला के मार रहे हो और हर साल न जाने कितनी ही सीताएँ अगवा होकर अपनी इज्जत गँवा रही हैं। तब न इस राम सेना का कहीं पता होता है न बजरंग दल का। लाल बत्ती पर जब सिग्नल टूटता है तब भगतसिंह दल वहाँ से हमेशा नदारद रहता है। और हमने क्या किया पूछ रहे हैं ना तो एक बात समझ लीजिए यदि हर आदमी अपने आप को सुधार ले तो आपकी स्टाइल से समाज सुधार की जरूरत ही न पड़े। मैनें यह कभी नहीं कहा कि पीटने की नहीं बनती। बनती है भैया, मगर लकीर पीटने से क्या फ़ायदा। जड़ में पहुँचा जाए तो उपाय कारगर होगा बस इतना ही तो कहा। ब्लॉगर्स को छायावादी भाषा की समझ होना चाहिए। आप सब सिर्फ़ शाब्दिक अर्थ के उथले तैराक हैं। खैर, कोई बात नहीं सुधार की उम्मीद और दुआ के साथ आप सबको नमस्कार।

Er. Diwas Dinesh Gaur said...
@किलर झपाटा
मेरे सवालों का जवाब दिए बिना ऊट-पटांग टिपियाने से कोई फायदा नहीं|
देश में पचासों अनियमितताएं हैं, तो क्या किसी को देश तोड़क बयानबाजी करने की आज़ादी मिल जाती है? इससे बड़ी मुर्खता की बात और क्या हो सकती है? और तुझ जैसे लोग उनका समर्थन भी करते हैं|
सारे खोट उस युवक में ही क्यों नज़र आ रहे हैं, जिसने भूषण को पीता, क्या भूषण निर्दोष है?
साफ़ साफ़ बोल, क्या कश्मीर को भारत से अलग कर देना चाहिए? घुमा फिर कर उत्तर मत देना, जो कहना है क्लीयर कट कहना, जैसे मैंने कहा|  और हाँ तमीज केवल तमीज के हकदारों को ही मिलती है| अयोग्य व्यक्तियों को तमीज देकर मैं तमीज के साथ बदतमीजी नहीं कर सकता|  मेरी इंजीनियरिंग से तुझे इतनी जलन क्यों है? जो भी हूँ, आज अपने दम पर हूँ| किसी के बाप को एक फूटी कौड़ी नहीं खिलाई|
प्रतीक माहेश्वरी said...
तो आपके हिसाब से प्रशांत भूषण ने जो टिप्पणी कश्मीर पे की वो गैर-जिम्मेदाराना थी?
मैं तो यह कहता हूँ कि अब किस कश्मीर की लड़ाई चल रही है? उस सफ़ेद बरफ पर जमी हुई खून वाली कश्मीर?
या फिर आये दिन होने वाले विरोधों की कश्मीर?
अब वो इस धरती का स्वर्ग नहीं रहा.. खून-खराबा और लड़ाई जहाँ एक नियम बन चूका है उसके लिए किसी का भी लड़ना फिजूली है.. और प्रशांत भूषण की पिटाई हुई तो ठीक.. पर फिर ऐसे ही लोग दिग्विजय और उसके जैसे ही अन्य लोगों की पिटाई करने क्यों नहीं जाते हैं? तब इनकी हवा क्यों निकल जाती है.. सिर्फ और सिर्फ इसलिए क्योंकि दिग्विजय जैसे लोगों के हाथ में सत्ता है..
प्रशांत भूषण तो एक आम आदमी है जिसे कोई भी पीट सकता है राह चलते पर अगर सत्ता पर बैठे गद्दारों के साथ ऐसा सुलूक कोई करके दिखाए तभी उनके लिए मन में श्रद्धा उमड़ेगी अन्यथा वो आतंक फैलाने वालों की ही श्रेणी में गिने जाएंगे..
किलर झपाटा said...
@दिवस दिनेश गौर जी,
हा हा क्या बात है इंजीनियर साहब! कह रहे हैं "तमीज देकर मैं तमीज के साथ बदतमीजी नहीं कर सकता"। और करते बदतमीज़ी ही जा रहे हैं। वाह वाह ! जानी राजकुमार की पिक्चर देख लिए हैं क्या ? जो डायलॉग पर डायलॉग जड़ते जा रहे हैं। आपकी बात का जवाब तो प्रतीक माहेश्वरी जी ने १००% दे ही दिया। अब मेरे जवाब की जरूरत ही नहीं रही। रही बात उस युवक की तो इस तरह के लोग बिल्ली के गू होते हैं जो न लीपने में यूज़ किया जा सकता है न पोतने में। कम से कम इंजीनियर साहब, आप तो उनके जैसा बनने की कोशिश न करें। और आप कोई न्यूज़ चैनल वाले हैं, जो आपके सवालों का जवाब दूँ ? आप इंजीनियरिंग करके इतनी शान क्यों बघार रहे हैं, भाई ? आजकल तो हगे-पदे लोग भी इंजीनियर बन जाते हैं, हा हा। हगों-पदों से जलन रख कर क्या फ़ायदा ? आप तो खैर, ऐसे नहीं हैं, क्योंकि आपने किसी के बाप को फ़ूटी कौड़ी वगैरह खिलाई ही नहीं है, है कि नहीं ? गुड बॉय, खिलाना भी नहीं, क्योंकि भले ही आप मुझसे कितना भी लड़ें, मगर भ्रष्टाचार से लड़ने में तो आप प्रशांत-भूषण जी के साथ ही खड़े नजर आ रहे हैं, एम आय राँग? अरे हाँ और वो आपके "क्लीयर कट" पर बात करना तो भूल ही गए। अरे भैया, सब कुछ क्लीयर कट होने लगता ना, तो ये कश्मीर समस्या ही ना खड़ी होती। हा हा। चलिए आपसे एक क्लीयर कट सवाल पूछता हूँ। बिना घुमाए फिराए सिर्फ़ ‘हाँ’ या ‘ना’ में उत्तर दीजिएगा, ओ.के.।
“आपने अश्लील फ़िल्में देखना छोड़ दिया ”? हा हा।
गैट वैल सून इंजीनियर साहब।

ZEAL said...
@ नीरज रोहिला -
लोकतंत्र है भी हमारे देश में ? ज़रा सुनिश्चित कर लें पहले।
यहाँ शांतिपूर्ण तरीके से अनशन कर रहे , सोये हुए स्त्री पुरुषोंको आधी रात में लाठियों से मारा जाता है , क्या यही लोकतंत्र है ?
घोटालेबाजों पर महामहिम की चुप्पी ही लोकतंत्र है क्या ?
आतंकवादी देश के दामाद बने बैठे हैं और मासूम जनता निरपराध मर रही है , क्या यही लोकतंत्र है ?
कश्मीर हमारे देश का अभिन्न अंग है , उसके लिए अलगाववादी बयान क्या लोकतंत्र का हिस्सा है ?
भारत का खंडित करने वाले वक्तव्य क्या लोकतंत्र के हिस्से में आते हैं ?
यदि हर भारतीय ऐसे ही बयान देगा तो "देशप्रेम" की परिभाषा क्या होगी ? और देशद्रोही तथा अलगाववादी किसे कहा जाएगा ? पाकिस्तानी ओर हिन्दुस्तानी में फर्क क्या रह जाएगा भला ?
इस तरह की बयानबाजी करने वालों को ऐसी ही सजा मिलनी चाहिए तत्काल से, ताकि अन्य सर-उठाते देशद्रोहियों को वक़्त रहते सही शिक्षा मिल जाए।

ZEAL said...
@ और भी तरीके .....
किसी ने यह नहीं बताया की और भी कौन से तरीके हो सकते हैं ? नपुंसकों की जमात यूँ भी ज्यादा है , तभी तो हमारा देश आजाद होते हुए भी गुलाम है।

ZEAL said...
@ JC जी ,
कैंसर जब प्रारम्भिक अवस्था में हो तभी उसका conservative treatment संभव है। स्थिति बिगड़ने पर व्याधिग्रस्त अंग को काट कर फेंक देना ही एक मात्र इलाज है , अन्यथा रोग हड्डियों तक पहुँच जाता है और मृत्यु अवश्यम्भावी है। अतः नासूर के बढ़ने से पहले ही उसे नष्ट कर देना चाहिए।
आज एक भूषण हैं , कर को दस हो जायेंगे , अतः ऐसे लोगों की पिटाई उचित है , ताकि लोग देशद्रोही बयान देने से पहले सौ बार सोचें।  गुनाहगार खुले घुमते हैं तो अन्य दुष्टों को भी दुष्टता करने के लिए बल मिलता है।
अतः शठे शाठ्ये समाचरेत ! ( ऐसा श्रीकृष्ण का उपदेश है )
कल करवाचौथ का उपवास था , पारिवारिक तथा सामाजिक दायित्वों की व्यस्तता के कारण अंतरजाल पर नहीं आ सकी , अतः आपके प्रश्न का उत्तर देने में विलम्ब हुआ। करबद्ध क्षमाप्राथी हूँ।

ZEAL said...
@ किलर झपाटा-
आपने लिखा मुझे ज़रा भी समझ नहीं है और ऊटपटांग लिखती हूँ।
क्या आप नासमझों के ही ब्लौग पर दर्शन देते हैं ? अथवा कोई और कारण है मुझ पर इतनी कृपा करने की ?
आपको चेतावनी दी जाती है की मेरे आलेख पर आये टिप्पणीकारों का अपमान करने की गुस्ताखी न करें। आपकी अन्य ID भी जानती हूँ। आपने अपने दोनों ID से यहाँ टिप्पणी कर रखी है।
आप कौन हैं , यह कोई जाने या न जाने लेकिन मैं पिछले एक वर्ष से जानती हूँ हूँ, जबसे आपने मेरे खिलाफ आलेख लिखकर भाड़े के टट्टुओं द्वारा मुझे बदनाम करने की कुचेष्टा की थी।
ऐसी कुचेष्टा बहुत से अज्ञानी स्त्री एवं पुरुष ब्लॉगर कर चुके हैं। जब अंगूर अप्राप्य हो जाते हैं तो लोग इसी ही कुचेष्टा करते हैं। आप का दिल यदि न भरा हो तो पुनः एक आलेख लिख दें , अब आपको और भी ज्यादा बदबूदार टिप्पणियां मिलेंगीं, क्यूंकि मुझसे द्वेष रखने वालों की बढ़ गयी है, जिसका लाभ आप ले सकते हैं।
द्वेष रखना आसान काम है , जो उथले लोग ही करते हैं। प्यार तो सिर्फ दिलदार ही करते हैं , सबके बस की बात नहीं।

ZEAL said...
@ किलर झपाटा-
आप दिवस के पीछे हाथ धोकर न पड़ें। वह एक देशभक्त युवा है। आपको व्यक्तिगत आक्षेप लगाने हों तो कहीं और जाइए । मेरे ही आलेख पर मेरे होनहार बेटे का अपमान करने की कुचेष्टा मत कीजिये।
गर्व है मुझे दिवस पर , हर माँ को गर्व होता है ऐसे बेटे पाने पर। गर्व है भारतमाता को अपने देशभक्त बेटों पर जिन खून में उबाल तो आता है । अन्यथा तो आजकल लोगों का रक्त जमा हुआ ही होता है।
रही बात उनके अहंकार करने कि, कि वे इंजीयर हैं , तो अवश्य करनी चाहिए। अपनी शिक्षा पर गर्व करना ही चाहिए। मुझे भी गर्व है दिवस कि शिक्षा पर ।  दिवस मेरा होनहार इंजिनियर-ब्लॉगर-देशभक्त बेटा है। आज ऐसे ही बेटों कि ज़रुरत है भारत माता को।

डा.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) said...
सीधी बात कर रहा हूँ किलर झपाटा नाम के प्राणी से-
भाई/बहन/लैंगिक विकलाँग क्या हो इसलिये संबोधन में कदाचित अड़चन न हो अन्यथा न लीजिये। संजय कटारनवरे ने जो भी लिखा उसे दोहराने की जरूरत नहीं है। आपने ये अनुमान कैसे लगा लिया कि कौन बिल्ली का गू है और बाकी लोग किस तरह के मल पदार्थ हैं। हम तो कभी समाज के सुधार की बात ही नहीं करते हम खुद सुगंधित हो जाएं आसपास की दुर्गंध स्वतः ही हल्की होने लगेगी। एक बात स्पष्ट बता दूँ कि हम लोग जीवन को ऑनलाइन ही नहीं बल्कि ऑफ़लाइन भी इसी अंदाज में जीते हैं। जीवन ब्लॉगिंग या कमेंट्स तक सीमित नहीं है, प्यार से गले लगाने और घूँसे से मुँह तोड़ देना भी तो है हमारे लिये, जहाँ जो मुद्रा चलती हो वो सिक्का निकाल लेते हैं। आप चाहें तो मेरी मेडिकल की उपाधि एम.डी. और पी.एच.डी. पर भी सवालिया निशान लगा सकते हैं। आप ४९८ ए के लिये परेशान हैं और हमारे कुछ परिचित १२४ ए के बारे में संघर्ष कर रहे हैं सबका अपना अपना महाभारत सजा हुआ है क्योंकि सबका आदर्शवाद भिन्न है। आपने नाथूराम गोडसे की बात कही है तो बस इतना बता दीजिये कि आपके दर्शन के अनुसार राष्ट्रवाद(मैं महाराष्ट्रवाद की बात नहीं कर रहा) क्या है। एतिहासिक गलतियाँ सुधारी जाने की प्रक्रिया इतनी धीमी होती है कि आप उसे शायद महसूस नहीं कर पा रहे हैं और हमें श्रीराम सेना या बजरंग दल या किसी फासीवादी सोच से उपजा मानने का दुराग्रह पाल बैठे हैं।
आप साफ़ तौर पर बताइये कि क्या आप वोट करते हैं?
यदि हाँ तो किस आधार पर? यदि ना तो कारण साफ़ करें??
आप लोकतंत्र और भारत के मौजूदा संविधान के बारे में क्या विचार रखते हैं, आपकी सोच में “विधि का शासन” क्या महत्त्व रखता है?
क्या आपकी जड़ें बरतानिया से जुड़ी हैं या अमेरिका से जो बीच-बीच में आप देवनागरी में आंग्लभाषा में विचार व्यक्त करने लगते हैं?
क्या आप मुझसे इतिहास(भारत एवं विश्व), भारत का समाज और समाज शास्त्र, विधि शास्त्र, अपराध शास्त्र, राजनीति विज्ञान, मनोविज्ञान, दर्शन शास्त्र, चिकित्सा शास्त्र, भाषा विज्ञान में से क्या किसी विषय पर शास्त्रार्थ करना चाहते हैं संभव है कि कुछ रचनात्मक निर्णय निकल आए?
ब्लॉगिंग करने वाले शाब्दिक तालाब में तैरने वाले लोग हैं या विचारों के समुद्र में गहरे गोता लगा कर मोती चुन कर लाने वाले इसका निर्णय आप कैसे लेते हैं, कुछ तो पैमाना होगा आपके पास तो अगली टिप्पणी में हमारे साथ बाँटना चाहेंगे?
क्या आप अश्लील फिल्में बनाते हैं?
आप या प्रतीक माहेश्वरी जी कब और कितनी बार काश्मीर होकर आए हैं ये बताएं तो इस विषय पर अवश्य बात करेंगे?
Jएक बात बतानी थी कि संजय कटारनवरे मराठी नहीं जन्मना हिंदीभाषी हैं लेकिन उनके पूर्वज महाराष्ट्र से थे
हम पीटते हैं लेकिन लकीर नहीं जो लकीरें बना रहा है उसे समझने का प्रयास करते हैं कि लकीरें रचनात्मक हैं या ध्वंसात्मक, उसके बाद बनी लकीरों को संवारने का जतन कर रहे हैं; आप भी योगदान करें। आत्मकेन्द्रित रह कर आत्ममुग्धता में लीन रहना समाज से अलग कर देता है। निःसंदेह आप मानव हैं तो सामाजिक होंगे ही यदि न हो तो भी आपका नैतिक दायित्व है मानना न मानना आपका निर्णय होगा लेकिन विचार अवश्य करिये।
हृदय से प्रेम सहित
डॉ.रूपेश श्रीवास्तव

Er. Diwas Dinesh Gaur said...
@किलर झपाटा
तेरी घटिया टिप्पणियों में ही तेरी घटिया सोच दिखाई दे रही है| अगर तू अश्लीलता से ऊपर उठकर कुछ सोच पाता तभी तुझे राष्ट्रवाद का कुछ आभास होता| मेरे सवाल का जवाब देने की तेरी औकात नहीं है| अश्लील फ़िल्में तू ही देख और करता रह वैचारिक हस्त मैथुन|
October 16, 2011 4:30 PM

Er. Diwas Dinesh Gaur said...
दिव्या दीदी
मेरे पास शब्द नहीं हैं| आप समझ सकती हैं, मैं क्या कहना चाहता हूँ|
आपने मुझमे जो विश्वास दिखाया है, उसे बनाए रखूंगा| निश्चित रूप से आप मेरी बड़ी बहन ही नहीं, मेरी माँ भी हैं| मुझे गर्व है मेरी माँ पर जो समाज के साथ साथ ब्लॉगजगत में फैली अनियमितताओं के खिलाफ भी लडती है| ब्लॉग भी तो समाज का ही एक हिस्सा है| यहाँ आपका लोहा अब सभी को मानना पड़ रहा है|
कितने ही मूर्खों ने आप पर आक्रमण किया, और स्वयं को मर्द समझ रहे थे| ऐसी परिस्थितियों में भी आपका लौहत्व नहीं डगमगाया| दुःख तो तब हुआ जब इन तथाकथित मर्दों की जी हुजूरी कुछ महिलाएं भी कर रही थीं जो आज तक जारी है| ऐसी महिलाओं पर समय क्या बर्बाद करना|

झपाटे टाइप प्राणी गली गली भौंकते दिखाई दे जाते हैं| इनमे और दिग्गी में अधिक अंतर नहीं है| इनकी बेहूदगी तो देखिये, अश्लीलता पर भी आ गए| फिर भी इनके लिए "झपाटा जी" जैसे सम्मान सूचक शब्दों का उपयोग दुःख दे रहा है| जो व्यक्ति हमारे देश को तोड़ने की बात कर रहा है उसे सम्मान मिल रहा है और कहते हैं "अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता"
कल यही आदमी माताओं और बहनों से दुकर्म की इच्छा जाहिर करेगा (अब इसकी नीयत तो इसकी टिप्पणियों में ही दिखाई दे जाती है, जब यह अश्लील फिल्मों के सवाल पूछ रहा है) तो क्या इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता मानकर सम्मानित किया जाएगा? इसमें और भूषण में फर्क ही क्या है?
खैर, इनका भी इलाज हो जाएगा|

आप इसी प्रकार अपना आशीर्वाद, प्रेम व विश्वास बनाए रखें|
आपका बेटा
दिवस


आदरणीय ज़ील मैडम,
वैसे तो मेरा आपसे वाकयुद्ध का कोई इरादा नहीं था, पर अब आप समर में उतर ही पड़ी हैं तो ठीक है। टिप्पणियाँ करने और पाने में क्रोध का स्थान नहीं होना चाहिए और सामने वाले को घड़ी-घड़ी उसकी ID बताने की धमकी देने वालों को मैं कायर समझता हूँ। ये सुविधाएँ ब्लॉग पर इसीलिए हैं कि अपनी बात निसंक्कोच रखी जा सके। अब आप लोग मेरी बात का जवाब दे नहीं पाते तो मैं क्या कर सकता हूँ जी ? वाह वाह आप स्व्यंभू भारत-माता और दिवस आपके देशभक्त बेटे ! क्या कहना ! और आपको बदनाम करने की कुचेष्टा करने की जरूरत ही क्या है जब आप खुद-बखुद अपनी बेहतरीन हरकतों की वजह से .......अब हटाइये भी। मैं बोलूँगा तो बोलोगे कि बोलता है। हा हा।
और मैडम सुनिए, मेरी हर टिप्पणी की भाषा जरा लैंस लगाकर पढ़ा कीजिए। मैं कतई अपमान-जनक बात किसी के लिए कभी करता नहीं। वो आपके तथाकथित बेटे (इंजीनियर साहब) ने मुझसे किस तरह बात की, पढ़ लीजिए। बाद इसके मुझे कुछ कहें। जब मेरी आपकी बात हो रही थी तो उन्हें भनभनाने की क्या जरूरत थी भला ? अब हैंडवाश डे पर झपाटा को छेड़ोगे भाई, तो वो तो हाथ धोकर पीछे पड़ेगा ही। हा हा। पुराना सफ़ाई-पसंद है ना। चूँकि आपने आदेश दिया है और आपकी बहुत इच्छा है तो ठीक है, अपने ब्लॉग पर इस वाकयुद्ध प्रकरण पर लेख लिख दुँगा। दे दीजिएगा अपनी पलटन के साथ मुझे उसी तरह हजारों गालियाँ। धन्यवाद।

वाह वाह रूपेश जी,
क्या सीधी बात की है आपने मुझसे। मगर भैया पहले मेरी इसके पूर्व की गई टिप्पणियाँ तो छाप लीजिए फिर आगे बात करिएगा। सयाना कौवा हमेशा गू (आपकी भाषा में मल) पर ही बैठता है और आप भी जल्दबाजी में वही कर बैठे हैं मुझ पर टिप्पणी करके। राज़ खुलने वाला है आपका। प्लीज़ डोण्ट माइंड। आप लोग इतने डरपोक क्यों हैं जो सवाल तो करते है जवाब के वक्त मॉडरेशन चालू कर लेते हैं। मुश्किल है ऐसे में प्रमोशन आपका।

इंजीनियर दिवस साहब,
मैंने आपसे सिर्फ़ हाँ या ना में जवाब पूछा था वो तो आप दे नहीं पाए। हार मान लीजिए भाई। ये मॉडरेशन लगाकर होशियारी दिखाने से थोड़ी जीत जाओगे। हा हा।  अच्छा ! तो आप अश्लील फ़िल्में देख देख कर वैचारिक हस्त मैथुन भी करते हैं। वैरी स्ट्रेंज। गन्दी बात है ये। आपके हितैषी वो आयुर्वेदाचार्य डॉ. रूपेश श्रीवास्तव जी (ज़ील के नाम से दुनिया को बेवकूफ़ बनाने वाले) ने नहीं बतलाया कि इससे शारिरिक कमजोरी आ जाती है। बतलाइए अब आपको तो मानसिक कमजोरी तक आ गई है। इसीलिए तो कहते हैं कि मन में कुत्सित विचारों को स्थान नहीं देना चाहिए। क्रोध वगैरह करना छोड़िए और टिप्पणी मॉडरेशन से बचे रहिए। आप भी जल्द उबर जाएंगे ऐसी परेशानियों से। भगवान आपको सदगति ओ सॉरी सदबुद्धि दे। धन्यवाद।   


43 टिप्‍पणियां:

Arvind Mishra ने कहा…

मुझे इसकी परवाह नहीं कि मैं यहान पहली टिप्पणी कर रहा हूँ तो लोग क्या क्या समझेगें और अर्थ लगायेगें ....
मगर जिन बातों पर आपने झपट्टा मारा है वह बिलकुल सटीक है चील्ह झपटते से भी ज्यादा सटीक ...
कुछ लोग इतने खराब नागरिक हैं कि उन्हें गैस चैंबर में हमेशा के लिए सुला देना चाहिए ....वे मानवता और इस धरती पर बोझ हैं ..खुद को देशभक्त मानते हैं मगर सबसे कन्फ्यूज और परले दर्जे के गधे हैं .....संयोग देखिये कि दोनों बिना सींग के हैं ...मगर गधा तो फिर भी बुद्धिमान है वह हौकाता नहीं मगर ये ऐसे गधे हैं जो बिना सींग के हौन्काते हैं ....नपुसंक लोग जीवन के हारे हताश लोग ....थू है .....

शेखचिल्ली का बाप ने कहा…

गधा तो फिर भी बुद्धिमान है वह हौकाता नहीं मगर ये ऐसे गधे हैं जो बिना सींग के हौन्काते हैं ....
थू ....थू ....थू

बेनामी ने कहा…

अबे झपाटे .................तेरी तो।
गाँड़ ही मार के रख दी बे तूने तो सबकी। अबे लौड़े तेरे को हर बात का जवाब कहाँ से सूझ जाता है बे ? कसम से मजा आ गया तेरे लेख को पढ़ कर। असल में ये दिवस, रूपेश वगैरह शायद तेरे से पहली बार टकराए हैं लगता है। नहीं तो इत्ती बातें न करते। सही तो कहा तूने। तू तो आप आप ही करता रहा मगर ये भोसड़ा चोदी वालों को बहुत शौक था तुझसे गाँड़ मराने का तो मरवा बैठे। अब बाम मलावा रहे होंगे बहनचोद लोग। अबे और तूने भी मादरचोद, कितने लंबे लंड से मारी, कि अब इनकी फ़ट के हाथ में आ गई है तो चिल्ल-पों मचाए हुए हैं। अबे तेरी टिप्पणी इसीलिए नहीं छाप रहे कि अब और गाँड़ मरवाने के लायक दम ही नहीं बची होगी। मेरे को भी तेरी स्टाइल की हँसी आ रही है। हा हा। और तू सबकी हा हा बहुत उड़ाता है, अब चुप कर गाँडू, हँसा हँसा के पेट दुखवा दिया।

अनुराग शिन्दे, अँधेरी वेस्ट, मुम्बई ने कहा…

आदरणीय झपाटा भाई साहब,
मुझे तो पूरे लेख में वो पार्ट सब्से मजेदार लगा जब आप दिवस से क्लियर कट के रिप्लाय में सिर्फ़ ’हाँ’ या ’ना’ में पूछते हो कि "दिवस,आपने अश्लील फ़िल्में देखना छॊड़ दिया?" हा हा हा हा
फ़ँस गये होंगे दिवस भैया, क्योंकि यादि ’हाँ’ बोलते तो मतलब था कि पहले देखते थे और ना बोलते तो मतलब है कि अभी भी देखते हैं। हा हा हा हा
बहुत मजा आ गया आप ग्रेट हो बहुत बुरा छापा इन लोगों को। बेचारे।

संतोष त्रिवेदी ने कहा…

विषैली झील जो सूख गई हो उस पर काहे पानी डाल रहे हो साब !
जहाँ रिश्ते बनते हैं,बदलते हैं और बिगड़ते भी हैं.....

अपने ब्लॉग पर काहे को गन्दगी ले आए हो ?

बंदरिया से कोई लेना देना नहीं हैं ने कहा…

अपने आस पास लगा मजमा देख कर बंदरिया ज्यादा ही उछल कूद मचाती हैं । जितनी भीड़ बढ़ती जाती हैं उतना जी बदरिया का नाचना बढ़ता जाता हैं ।
कभी कभी उसकी गुलाटीया देखने वाली होती हैं । कभी सर पर दुपट्टा लेकर वो एक बहू बन जाती हैं तो कभी हाथ में पर्स लटका कर एक फिल्म स्टार ।
बस मजेदार बात यही होती हैं वो भीड़ में ही खुश रहती है और मदारी की रस्सी से बंधी अपने करतब दिखाती रहती हैं ।

हास्य-व्यंग्य का रंग गोपाल तिवारी के संग ने कहा…

Kiler ji aapne achha jhapata mara hai. Achha laga.

चोदू JC का दुश्मन ने कहा…

किलर भैया मैं तो इस JC नाम के बुड्ढे से बड़ा परेशान हूँ. इसने जील की पोस्ट पे कमेन्ट करने का ठेका ले रखा है और ये बहुत पकाता है. कसम से, बाई गौड.

चोदू JC का दुश्मन ने कहा…

किलर भैया मैं तो इस JC नाम के बुड्ढे से बड़ा परेशान हूँ. इसने जील की पोस्ट पे कमेन्ट करने का ठेका ले रखा है और ये बहुत पकाता है. कसम से, बाई गौड.

ब्लौगजगत के शोले ने कहा…

अरे सुन लो ब्लौगजगत वालों!
दिव्या ने हिजड़ों की फ़ौज बनाई है! हा हा हा!

बेनामी ने कहा…

जील एक शनीचरी माई है
वहां जाने वाले हैं उसके भक्त

पंजाबी माणूस ने कहा…

दोस्तों तुसी घाब्रू नका,
इस चोदू JC की मैया भी यदि ना चुदी तो कहना। मान गए गुरू किलर झपाटा भाई त्वाडा जवाब नहीं। आपके लेख को पढ़ पढ़ के मुझे इतनी हँसी आई कि मत पूछिए। हा हा हा हा हा .............और टिप्पणियों में तो छूट लोग गाली दे रहे हैं एकदम ओपन रायल हार्ट है आपका। बैंड बजा डाली ज़ील, दिवस जेसी, रूपेश वगैरह की आपाने पहलवान जी। वा वा। अगलों की बोलती ही बंद कर दी।

दिवस की माँ की चूत ने कहा…

दिवस दिनेश गौर की तो आपने अम्मा चोद के रख दी झपाटा भाइजान। हाआआआआआआआआआआआआआआआअ....
ये साला कहाँ आपके फ़ाँगड़े पड़ गया लिड़ऊ। दिवस इस रिअयली बिल्ली का गू ना लीपने का ना पोतने का।

दिव्या (ज़ील) के बहनचोद भाई (दिवस) ने कहा…

दिव्या दीदी
आपको मानना पड़ेगा| आपके द्वारा सोची गयी संभावना संभव हो जाती है|
आपने कहा था कि दिव्या को बदनाम करती हुई कोई पोस्ट लगा दो तो ब्लॉग जगत के कई भाड़े के टट्टू (अरविन्द मिश्र, अमरेन्द्र त्रिपाठी, संतोष त्रिवेदी, अनुराग शर्मा, अमित शर्मा, समीर लाल, मासूम आदि) सूंघते हुए वहां पहुँच जाएंगे|
आज सुबह ही किलर झपाटा नामक एक मंदबुद्धि प्राणी ने आपकी बातों पर गौर फरमाया और लाभ भी उठाया| जहाँ कई भाड़े के टट्टू सूंघते हुए वहां पहुँच गए| इनका तुर्रा तो देखिये, इस गुमनाम ब्लोगर की जानकारी भी इन टट्टुओं को आपके ब्लॉग पर आपकी पोस्ट
http://zealzen.blogspot.com/2011/10/blog-post_14.html
से ही मिली| इनका उतावलापन भी देखिये, कि यहाँ इन्हें यह भी मतलब नहीं कि यह गुमनाम ब्लोगर (जिसे कल तक कोई जानता तक नहीं था) देश्तोड़क बातें कर रहा है| ये उन बातों को भी अनदेखा कर गए और केवल दिव्या पर केन्द्रित हो गए|
इनको देखकर कुत्तों की याद आ गयी जो भूखे प्यासे मरते रहते हैं और यहाँ वहां बोटियाँ सूंघते रहते हैं| जैसे ही कहीं से कुछ बोटी-शोटी की गंध आई नहीं कि भौंकते हुए कूद पड़े|

साथ ही गंदगी व नीचता की सभी हदें इस गुमनाम ब्लोगर ने पूरी कर दीं| अर्जी फर्जी नामों से खुद ही कमेन्ट कर रहा है| कमेन्ट करने वाली प्रोफाइलों के नाम भी ऐसे ऐसे कि सोचें तो चकरा जाएं| और तो और यहाँ आदरणीय JC जी को भी बदनाम किया गया| उनके नाम के आगे एक बेहद अश्लील शब्द लिखकर एक प्रोफाइल बनाई गयी व कमेन्ट किया गया|

ज़रा आप भी एक नज़र इस गंदगी पर डालें|
http://killerjhapata.blogspot.com/2011/10/blog-post_17.html

बिल्ली का गू ‘दिवस’ का परम हितैषी ने कहा…

अबे लंड के बाल ’दिवस" शायद तू झपाटा भाईजान को नहीं जानता। गाँडू, अच्छे अच्छों ने अगले के आगे सरेण्डर कर दिया चुदऊ। पत्रिकाओं में बड़े बड़े लेख लिखे गए हैं अगले के बारे में, नहीं मालुम तो लेखिका मृणाल पाण्डे जी से पूछ के आ। आमिर खान की पिक्चर डैल्ही बैल्ही इन्हीं की गाली गलौज वाली ब्लॉग स्टाइल से प्रेरित होकर बनाई गई है और आमिर भाईजान ने इन्हें इस थीम करोड़ों रुपए पे किए हैं। ये जिसके पीछे हाथ धोकर पड़े उसका बण्टाढार हुआ समझो। बहुत चाहते हैं बे लोग इनको। ऐसा मत बोल कि इसको कोई जानता नहीं। हा हा भोसड़ी के, अभी भी मौका है प्यार से जाकर सॉरी बोल दे अगले को। उनका दोस्त बनेगा तो फ़ायदे में रहेगा। वो खुद कभी गंदी टिप्पणी नहीं करते। लोग उनके ब्लॉग पर आकर बेनामी और फ़ेक नामों से अच्छी औ गन्दी सब बातें कर जाते हैं। ना वो बुरा मानते हैं और ना ही किसी की कोई टिप्पणी मिटाते हैं। इतनी दिलेरी है बे किसी में बता ? तेरी दिव्या टीम ने तो तुरंत ही म~ऒडरेशन चालू कर लिया था जैसे ही किलर भाई के झपाटे पड़ना चालू हुए थे। बात करता है।
और अरविंद मिश्रा, समीरलाल वगैरह को गाली मत दे बे, यदि ब्लॉगिंग आगे जारी रखनी है। तेरा हितैषी।

ZEAL ने कहा…

.

@ झपाटा -

आपने मुझे और रूपेश भैया को एक ही शख्स समझा इसके लिए आपका आभार। यह सच है कि मुझमें और मेरे भाई-बहनों में कोई फर्क नहीं है। हमारा स्नेह हमें एक अटूट बंधन में बांधता है जो आम व्यक्ति को यही बोध करता है कि ये एक हैं। पुनः कहती हूँ.... हाँ ! मैं और मेरे सभी शुभचिंतक एक ही हैं।

एक बार वाणी शर्मा नामक ब्लॉगर ने मुझे और रचना को भी एक ही समझा था।

मुझे बहुत अच्छा लगता है जब लोग मुझे रचना और रूपेश भैया के समकक्ष , एक ही समझ लेते हैं। वैसे मुझे अभी बहुत समय लगेगा इतना निडर बनने में और इतना बडप्पन खुद में लाने में। पर फिर भी आपका आभार कि हम भाई बहनों को एक ही समझा।

रही बात मोडरेशन कि , तो वह बहुत आवश्यक है ताकि आप जैसे लोगों के घटिया कमेंट्स को रोका जा सके , जो विषय पर नहीं लिखते बल्कि विषय से इतर , विवादित, व्यक्तिगत और विषाक्त लिखते हैं।

-------------



मूल आलेख का लिंक संलग्न कर रही हूँ आपके पाठकों के लिए ताकि उन्हें सुविधा हो , क्यूंकि आपने सारे कमेंट्स नहीं छापे यहाँ , यह उनके साथ अन्याय है अतः लिंक नीचे दे रही हूँ।
-----

मेरे देश कि धरती गद्दार उगले , उगले रोज़ मक्कार...
http://zealzen.blogspot.com/2011/10/blog-post_14.html

शुभकामनाओं सहित,
दिव्या।

.

किलर झपाटा ने कहा…

सबसे पहले तो अरविंद मिश्रा जी, शेख चिल्ली भाई के फ़ादर जी और ज़ील जी का बहुत बहुत आभार जो उन्होंने मेरा साथ अपनी दार्शनिक शालीनता के साथ दिया और यह संदेश दिया ब्लॉगजगत को कि किलर झपाटा कोई दुष्ट पाजी इंसान नहीं बल्कि आप सबके जैसा ही एक ब्लॉगर हूँ। मगर साथ में मुझे हमेशा की तरह बेनामी भाइयों की गाली गलौज युक्त टिप्पणियों को देखकर होता है। अरे भैया लोग, अपने ID से क्यों नहीं आते मेरे ब्लॉग पर और अच्छी भाषा में क्यों नही देते टिप्पणियाँ ? मैं तो हमेशा आपके ब्लॉगों पर अच्छी ही भाषा में टिप्पणी करता हूँ। कब मैंने किसी को गालियाँ दी बतलाइए ? लोग मुझ पर आरोप लगा बैठते हैं मैं ही खुद अपने ब्लॉग पर ये गाली गलौज वाली टिप्पणी करता हूँ। क्या मैं खुद को गाली बक सकता हूँ ? खैर आप लोगों की मर्जी अगर आप लोगों को इसी में आनंद आता है तो मैं क्या कर सकता हूँ। मगर इससे मेरे दोस्तों को दुख होता है, भाई कम से कम इसका खयाल रखना चाहिए।

@ परम आदरणीय ज़ील मैडम,
आप पहले अपने भाई रूपेश जी की भाषा शैली का अवलोकन कर लें और फिर मुझे डाँटें। आपके ब्लॉग पर जब तक हम लोगों का संवाद हो रहा था ये कहीं पिक्चर में नहीं थे और उसके पहले तक उनकी टिप्पणी भी कहीं नहीं थी। अचानक कहीं से आकर आपकी पैरवी इस ढंग से करने लगे जैसे आप मुझे जवाब दे रही हों। क्या ये आपके वकील हैं? जो आपकी पैरवी कर रहे थे। हा हा। और ये मिस्टर दिवस इंजीनियर। इनको बतलाएँ कि जब मेरे शब्दवाणों ने इन्हें भीतर तक झंझोड़ दिया तो गाल पर पड़ा हुआ एक तमाचा भी किसी के दिल को कितनी पीड़ा देता होगा। भगवान न करे कभी इनके साथ भूषण जैसा वाक्या हो। तब पूछिएगा दिवस से क्यों गाल दुख रहा है कि दिल ? हर बात का जवाब मार पिटाई नहीं है। शब्द का जवाब शब्द ही होता है और मारपीट का जवाब मारपीट। इसके जस्ट पहले वाली मेरी पोस्ट देखिए, उसमे तो मैने भी कहा है कि पीटने की बनती है। मगर उसका मतलब तमाचेबाजी कतई नहीं होता। मैं विषय से इतर, विवादित, व्यक्तिगत और विषाक्त नहीं लिखता बल्कि ये कहता हूँ आप सब हर विषय पर स्पष्ट बहस जरूर करें मगर वह किसी के प्रति क्रोध के आधीन ना हो। हल्कापन होना चाहिए। ज्यादा खून खौलाने वाली बातों से क्या दुनिया बदल जाएगी ? दुनिया जब भी बदली है सहिष्णुता से ही बदली है। और आप लोग सबके सब हमेशा गुस्से में ही रहे आते हो। हा हा। खैर आप सबको यदि मेरी बातें बुरी लगी हों तो कोई बात नहीं। ऐसा तो चलता ही रहता है।

जील परिवार को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ।
जय हिन्द।

डा.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) ने कहा…

बेनामी या फिर साइन इन करके अजीबो-गरीब नामों से गालियाँ लिखना ये तो पुराना टोटका है। मैं ने जो भी लिखा उसमें आपको दार्शनिकता नजर आयी उसके लिये धन्यवाद । दूसरी बात कि आपने मेरे बारे में एक विशेषण प्रयोग करा है “सेक्स ब्लाइंड” कदाचित स्पष्ट नहीं है क्योंकि मैं तो बस इतना चाहता था कि आप भाई हैं या बहन ये बात संबोधन में जोड़ लेता लेकिन आपने इसे मेरे अंधत्व से जोड़ दिया, मैं बुरा नहीं मानूँगा ये आपका नजरिया है। मैं वकील नहीं चिकित्सक हूँ। मेरी भाषा व्यक्ति अनुरूप परिवर्तित होती है कई भाषाएं जानता हूँ तुर्की ब तुर्की जवाब दे लेता हूँ। मुझे इस बात की भी खुशी है कि आपने अपने ब्लॉग पर मेरे बारे में ज़िक्र औ फ़िक्र करा। आपने मेरी तमाम बातों को نظرانداز कर दिया है। कभी मुंबई आएं तो सम्पर्क करें मेरा मोबाइल नं.०९२२४४९६५५५ है । मुल्क हमारा है तो हमें ही बेहतरी के प्रयास करने होंगे और वो रास्ते कौन से होंगे ये हमें गम्भीर विचार विमर्श के बाद ही निर्णय करना होगा। डॉ.दिव्या श्रीवास्तव और मैं एक हैं इसमें आपको कोई संदेह नहीं होना चाहिये बल्कि इस फ़ेहरिस्त में दिवस गौर, मुनव्वर सुल्ताना, मनीषा नारायण, रम्भा हसन का भी नाम जोड़ लें।
यदि माँ-बहन की गालियाँ लिखने से समस्याएं हल हो जातीं तो शायद अब तक आप दोयम न होते। चलिये कुछ रचनात्मक करें। यदि अपनी नीति के तहत इस कमेंट को हटाना चाहें तो मुझे कोई परेशानी नहीं बस मेरी बात आप तक पहुंचानी थी।
चलिये मैं भी हँस लेता हूँ हा हा हा.... उम्मीद है इसकी गूँज आपको महसूस होती रहेगी।

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
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बेनामी ने कहा…

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ऊपर वाले रशियन बेनामी का बाप हिन्दी बेनामी ने कहा…

पीटर पता करने के लिए एक फ़ोन नंबर प्राप्त करने के लिए फोन नंबर डेटाबेस MGTS टेलीफोन पता, Bashkortostan beeline beeline डेटाबेस एमटीएस एक मोबाइल फोन जासूस beeline के लिए सेवा के फोन डेटाबेस द्वारा एक व्यक्ति को खोजने के लिए, कैसे आप अपने मोबाइल फोन 2008 में सेंट पीटर्सबर्ग के पते के आधार का स्थान पता करने के लिए एक व्यक्ति के ठिकाने को खोजने के लिए एक सेल फोन कार्यक्रम पर, प्रोग्राम फ़ोन मधुमक्खी अभिदाता लाइन लगाने के स्थान निर्धारित करता है कि मैं दूसरे लोगों एसएमएस संदेश पढ़ सकते हैं, यूक्रेन सेंट पीटर्सबर्ग के लिए लक्षित टेलीफोन डेटाबेस में मोबाइल फ़ोन नंबर पर उपभोक्ता के स्थान खोज के अलावा किसी अन्य व्यक्ति को खोजने के लिए.......

कृपया झपाटा प्राजी को बेवकूफ़ ना समझें रशियन बेनामी (रूपेशजी) और उनकी अकल को نظرانداز (नज़र अंदाज़) भी ना करें क्योंकि ये भी बहुत पुराना टोटका है।

डॉ. रूपेश श्रीवास्तव (तुर्की-बा-तुर्र्रा) ने कहा…

المجهول أو علامة غريبة -- التجريبية القديمة الفقيرة ، وهذا هو لكتابة أسماء هذه الانتهاكات. لم أرى الكلمات المكتوبة : شكرا لكم على الفلسفة الخاصة بك.ولن يكون ذلك في طريقك. أنا لست محاميا الطبيب. يتم تغيير لغتي لتناسب الشخص في الإجابة على العديد من اللغات سأكون تركيا من تركيا. ويسرني أن كنت الرعاية واذكر لي على بلدي بلوق. لدي كل الأشياء التي نظرانداز. إذا حان وقت مضى الى مومباي ، يرجى الاتصال رقم هاتفي المحمول هو 0.09224496555. ثم لدينا لتحسين بلدنا والطريقة التي سوف يناقشون هذه المسألة إلا بعد أن علينا أن نكون جادين. الدكتور سريفاستافا ديفيا وأنا واحدة ، فإنه ينبغي أن يكون هناك شك ولكن هل لاحظت फ़ेहरिस्त ي اليوم ، منور سلطانة ، نارايان كويرالا ، रम्भा إضافة اسم حسن.
إذا كانت الأم -- الأخت من مشاكل سوء المعاملة وسيكتب ذلك ربما كنت لا الثانوية. دعونا نفعل شيئا الإبداعية. إذا كانت السياسة الخاصة بك إذا كنت تريد حذف هذا التعليق لا أمانع في الحديث إليكم للتو لتقديم.
يأتي يوم ، وأنا أيضا يضحك ها ها ها ها.... نأمل أن تفوت عليك أصداء.

किलर झपाटा ने कहा…

पसंदीदा खेल मेरा किलकिल काँटा

खुद की जला बैठा मैं झाँटा

जूते चप्पल खुराक है मेरी

ध्यान रहे पर ब्रान्ड हो बाटा

बाप का मेरे पता नहीं है

नाम है मेरा किलर झपाटा


ये देखिये मैं भी कविता लिखने लगा योगेन्द्र मौद्गिल की तरह। अब हँसने की बारी है हा हा हा कैसी लगी ये कविता ये तो बताइये?

ज़ील ने कहा…

मेरी माँ को बाप पूरा नहीं पड़ता था तो उसे मजबूरन गधे घोड़े जैसे जानवरों की मदद लेनी पड़ती थी जिनकी मैं पैदाइश हूँ। जब गधे ने जोर से मेरी माँ को नीचे से पेला तो मैं माँ की गांड से बाहर निकल आई और गणजली ब्लॉगिंग करने लगी ताकि अपनी माँ की इच्छा पूरी कर सकूं जो बाप पूरी नहीं कर पाता है। अब मैं अपनी माँ की तरफ से सबसे दिन में पाँच बार बजवाती हूँ जिससे उसे अब गधे घोड़े सुअर की जरूरत नहीं पड़ती। यदि आप लोग चाहें तो मेरी मदद कर सकते हैं क्योंकि मैं अपनी माँ के साथ इतना बिजी रहती हूँ कि अब मेरा रूपेश और दिवस इधर उधर गू खा रहे हैं उनकी गाँड़ आप लोग बजा लिया करिये और ब्लागर होने की जिम्मेदारी निभाइये।

किलर झपाटा फ़ैंस क्लब ने कहा…

झपाटा भैया से शास्त्रार्थ करने में डॉ. रूपेश दिवस औए ज़ील की गाँड में फ़ट रही थी इसलिए बेचारों ने किलर भैया की नकली प्रोफ़ाइल बना कर उनके ही नाम से टिप्पणियाँ करना शुरू कर दीं। ये सबके सब चुदऊ लोग ज़ील के ब्लॉग पर भी झपाटा भैया की नकली प्रोफ़ाइल बना कर माफ़ी वाफ़ी माँग रहे हैं। ये भोसड़ीवाले, झपाटा भैया की हर बात से इतना परेशान हो गए हैं कि जो झपाटा भैया कह रहे उसी पर पोस्ट पे पोस्ट मारे जा रहे हैं। उन्होंने गाँधी की बात की तो गाँधी पर पोस्ट मार दी। क्रोध मत करो कहा तो दुर्गा सप्तशती के पाठ दीवाली में करने लग पड़े। हग भरा रे इन लोगों ने डर के मारे। छी.......।
इनको तो छोटे चूतिया समझते थे, ये तो गधे की चूत के खसखस निकले यार, बहुत ही विशाल विशाल। शायद इन सभी की झाँटों में भी कोई खुजाल बाल ने जनम ले लिया है। वीट लगाए बिना मानेंगे नही। ही ही ही ही ही

किलर झपाटा ने कहा…

चलो दोस्तों अब मुझे कल हाँगकाँग से मुम्बई के लिए रवाना होना है। इस बार मेरा प्यारा दोस्त दिल्लू (खली) भी आ रहा है इंडिया। दीवाली उसके गाँव में ही मनाना है। मुझे तैयारी भी करनी है, सो मैं चलता हूँ। जय हिन्द। टिप्पणीयों में अब मैं भी मॉडरेशन ऑन करके जा रहा हूँ। क्योंकि दीवाली के पहले मेल मिलन का वातावरण होना चाहिए ना की झगड़े का है ना ? बाय बाय ऑल ऑफ़ यू फ़्राम हॉगकॉग फ़ोर 15 days. Happy Diwali to all of you.

मुनेन्द्र सोनी ने कहा…

तुम्हें इतनी जल्दी मॉडरेशन की जरूरत महसूस होने लगेगी ये नहीं पता था लेकिन चलो समझ आ गयी कि तुम जैसी लोगों के कारण हमें मॉडरेशन करना पड़ता है। डरपोक होना और बहादुर होना ब्लॉगिंग से बकवास करने से सिद्ध नहीं होता । अब मुझे हँसी आ रही है तुम्हारे जिंदगी जीने के अंदाज पर । तुम्हें लगता है कि मुफ़्त के मिले साइबर स्पेस में एक ब्लॉग बना कर कुछ भी लिखने से समाज या व्यक्ति में बदलाव आ जाएगा या तुम्हारे बिलबिलाने से हम कमजोर पड़ जाएंगे। हम लोग तुम जैसे लोगों को जवाब देना तुम जैसे लोगों से ही सीखे हैं कि तुम कौन सी भाषा समझते हो। तुम किसी भी नाम से ओपन आई.डी.से अपने ब्लॉग पर कमेंट्स लिखते रहो हमारी सेहत पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। मैं तुमको अभी भी मुंबई आने का न्योता दे रहा हूँ कि आओ और सामने बात करो यदि साहस है । अपनी पहचान जाहिर करो तो तुम्हें जल्द ही मैं खुद तुम्हारे सामने तुम्हें सबसे बुरे सपने के रूप में दिखूंगा यकीन मानो कि तुम्हारे जैसा पहलवान मुझसे लड़ कर जीत जाए तो जिंदगी भर तुम्हारा कच्छा धोना मंजूर है। अपनी माँ बहनों और पूर्वजों को शर्मिंदा मत करो तुम जो भी हो ये जान लो कि ब्लॉगिंग करके कुछ हासिल नहीं कर पाओगे भले ही हमें कितनी भी गालियाँ लिख लो। तुम्हें रगेद कर मॉडरेशन तक लाना था सो ले आया लेकिन ये मेरी जीत या तुम्हारी हार नहीं है क्योंकि मेरा तुमसे कोई झगड़ा है ही नहीं। मेरी बातों को गम्भीरता से लेना मैं हँसता भी गम्भीरता से हूँ। कमेंट डिलीट करना चाहो तो कर दो लेकिन मेरी बात तो तुम तक पहुंच ही रही है। मैं क्या हूँ ये तो तुम समझ पा रहे हो अच्छी तरह से।
जय जय भड़ास

किलर झपाटा ने कहा…

प्रिय भाई मुन्नू (मुनेन्द्र सोनी),
क्या बेहतरीन टीप दी है हा हा। मुझे तो मालूम ही था कि आप लाख लन्तरानी करते रहो लेकिन जब मैं लन्तरानी कहूँगा तब आप लोग फ़ड़फ़ड़ा फ़ड़फ़ड़ा के रब्बे-अरनी कहोगे। हा हा बच्चों चूंकि आप समझते हो, इसलिए ये भी जानते होगे कि मूसा को जब अल्ला मियाँ ने अपना जलवा दिखाया था तो वो नहीं देख सके थे। मेरी पहचान भी कुछ इसी तरह है बच्चों। इस फ़िराक में पड़ने के बजाय कि ये किलर झपाटा कौन है ? आप लोग ब्लॉगिंग और जवाब-सवाल पर अधिक ध्यान दिया करो। आप लोगों का मजा लेने के लिए मॉडरेशन लगाया है। कोई घबरा के नहीं। हा हा। मुझे तो बहुत रोक रहे थे अब खुद टीप नहीं दे पा रहे तो कैसे तड़प रहे हो आप लोग अहा। आय एम एन्जाइंग दैट। और बेटी जील आपको मंत्र ठीक से लिखना नहीं आता है तो लिखा मत करो। गलत लिखने से माताजी नाराज हो जाएंगी। फिर आप और आपकी टीम कहीं चपतयाई जाने लगे तो भाई मुझसे मत कहना। ओ.के.। बाय।

प्रेम सरोवर ने कहा…

आपका पोस्ट अच्छा लगा । धन्यवाद । मेरे पोस्ट पर आपका स्वागत है ।

बैकुण्ठ कुशवाहा, जलगाँव (महाराषट्र) ने कहा…

परम आदरणीय झपाटा भाई
आप भारत आने वाले हैं ये सुनकर बहुत प्रसन्नता हुई। २९-३० अक्टूबर को मैं भी जलगाँव से मुम्बई आने वाला हूँ। आप तो सेलेब्रिटि हैं, सर मैं आपसे मिलना चाहता हूँ। एक बार बस एक बार सर। गरीब आदमी हूँ सर आप लोगों के सामने। बीमार रहता हूँ मगर जवानी में पहलवानी अखाड़ा कर चुका हूँ। आप जैसे लोगों से मिलने का शौक अब भी रकहता हूँ इसलिए बहुत दिल में है कि किसी पहलवान से मिलूँ। प्लीज एक बार मिलने का मौका जरूर दीजिए।

किलर झपाटा के पिछवाड़े में खजूर का पेड़ डालने वाले ने कहा…

अबे चिरकुट हम क्या हैं ये तू इसलिये नहीं समझ सकता क्योंकि तेरी गाँड में दम नहीं है कि सामने आकर मिल सके तेरी गाँड में जब हमने खजूर का पेड़ घुसाया तो तुझे क्या लगा कि हम मजे नहीं ले रहे हैं। अबे सुअर की पैदाइश तू कमेंट्स हटा और दोबारा हमारे नाम से लिख बस इसी सुअर लोटन में हम तेरी थूथनी दबाए रखेंगे कीचड़ में जब तक तू मरने न लगे। तूने अब तक बताया नहीं कि तेरा बाप कोई गोरा था क्या जो बीच बीच में अंग्रेजी में चुदुर चुदुर करता है? मैं अपनी बातें तुझ तक इसी तरह तेरी गाँड में अलाव सुलगाने के लिये लिखा करूंगा जब तक वो झुलस कर कोयला न हो जाए। तू चूतिये जो ट्रिक्स कर रहा है वो हमने तुझ जैसे गाँडुओं से ही सीख कर तुम लोगों पर आजमायी हैं। हम भी ठहाके लगा रहे हैं तेरी फट्टूगिरी पर कि डॉ.रूपेश श्रीवास्तव ने मोबाइल नंबर और पता भी दे दिया तो तू किन्ही और लोगों से गाँड मरा रहा है असली पहलवानों से मरा तो तुझे समझ में आएगा कि गाँड का फटना किसे कहते हैं जो तूने अब तक शायद महसूस नहीं करा।
हा हा हा हा हा हा....
बिलबिला मत अभी तो और फाड़ी जाएगी तेरी...
तू मॉडरेशन मत लगा देख तो हम तेरी इसी तरह सबके सामने खोल कर पेलाई करते रहेंगे तू जितना चाहे हग ले हम सब तेरी गाँड में दोबारा घुसाएंगे चूतिये
जय जय भड़ास

Tera baap ने कहा…

tere baap ne ab tak tujhe moderation hatane ko nahi kaha choot ke bhoot??? Gaand mein dumm hai to hata kar dekh kaisa mazaa aayega tujhe....
ha ha ha
ha ha ha

teri maa ka khasam ने कहा…

teri gaand mein hathi ka louda...
ha ha ha

रूपेश श्रीवास्तव के मोबाईल की बऊ का भोसड़ा ने कहा…

अबे ओ भड़ासियों, तुम लोग अपने आप को बहुत सयाना और बाकी सबको गाँडू समझते थे। अबे झाँटुओं, किलर भाई के एक ही झपाटे ने तुम सबकी झाँटें झपट के झाड़ ली है। अब तुम लोग सिर्फ़ फड़फड़ा रहे हो झाँट के बसाए हुए पसीनों और कुछ नहीं। मजे तुम नहीं झपाटा भाई ले रहे हैं। कल रात भायखल्ला में नवाब पहलवान के घर मैं उनसे मिलके आया हूँ। कल ही हाँगकाँग से मुम्बई आये हैं। रूपेश चुदऊ ने मोबाईल नम्बर दे के बहुत बड़ी गलती कर दी है। बहुत जल्द बऊ चुदने वाली है उस चरम चूतिए की। मेरी तो सलाह है कि झपाटे से दुशमनी मोल लेने के बजाये यह भोसड़ी का रुप्पू उन्हें दोस्त बना ले। शायद बच जाएगा। वरना झपाटा जी ने तो अच्छे अच्छों की गाँड़ का नाप वर्नियर कैलीपर्स लगा कर ले लिया है। हा हा।

किलर झपाटा ने कहा…

आदरणीय गीरीश मुकुल जी,
मैं आप जैसे वरिष्ठ ब्लागर का दिल से मान करता हूँ। (मैडम) ज़ील, रूपेश जी, इंजीनियर दिवस आदि को कम से आप लोगों से शालीनता-पूर्वक विरोध दर्ज कराना और टिप्पणियाँ करना सीखना चाहिये। इन लोगों ने मुझसे सीधे तू-तड़ाक प्रारंभ कर दी थी। दिवस वाज़ फ़र्स्ट टू रिएक्ट इन दैट मैनर। मैंने इनकी बात को हल्के फ़ुल्के इटाइल से काटा तो ये प्रशांत भूषण को छॊड़ महात्मा को गरियाने लगे। उनकी बात हो भी नहीं पाई कि भवानी माता को बीच में ले आये। आप तो जानते ही हैं कि मैं टिप्पणियाँ डीलिट नहीं करता। अब कोई किसी को कुछ भी बोलता रहे। मैं क्या करूँ? मैं तो अच्छे अच्छे लोगों को उनके मित्रों से भिड़ने से बचाता रहता हूँ, भाई। मैं आपकी बात मान कर इन लोगों के इनके हाल पर छोड़ देता हूँ। मगर इन लोगों को आप भी तो कुछ समझाइये खास करके रूपेश और दिवस को। जाइये इन सभी को मैने आपके कहने पर माफ़ कर दिया। खुश ?

मेरी पोस्ट पर कमेण्ट करने अरविंद जी स्मार्ट इंडियन जी वगैरह का बहुत बहुत धन्यवाद और उनका इस वजह से जो ज़ील एण्ड कम्पनी ने धृष्टता पूर्वक अपमान किया उसके लिए मुझे बहुत अफ़सोस है।

डा.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) ने कहा…

महाशय जी,गाली-गलौज तो हम भी कर लेते हैं लेकिन आप जैसों को गालियों की जरूरत है ही नहीं इसलिये चाहा कि आप सामने आकर देख लीजिये तो सारी बात साफ़ हो जाएगी। मैंने ये जानना चाहा था कि आप बीच में अंग्रेजी को देवनागरी में लिख कर क्या व्यक्त करना चाहते हैं? भायखला के नवाब पहलवान को मेरा मोबाइल नंबर दिया या नहीं? मेरी बऊ के बारे में कुछ बुरा कहने वाले की जुबान खींच कर अपने जूते चमका सकने की ताकत जिस्म में भी है और दिमाग में भी। मैं तू-तड़ाक की भाषा बोलने पर यकीन नहीं रखता लेकिन आप जिस तरह की चिरकुटई कर रहे हैं उससे पता चल रहा था कि आप कितने शालीन हैं जब आपको भड़ासियों ने आपको रगड़ा तो आपको मॉडरेशन सूझ गया वरना इससे पहले तो आपके हमें उपदेश चालू थे और हमें डरपोक जताते बताते नहीं थक रहे थे। उम्मीद है कि आप को समझ विकसित हो गयी होगी कि मॉडरेशन की आवश्यकता डर के कारण नहीं शालीनता के कारण है। आप जिस तरह के "ओपन आई.डी." के कमेंट्स प्रकाशित कर रहे हैं उससे भी आपकी शालीनता पता चल रही है बस आपकी इसी चिरकुटई को बताने के लिये भड़ासियों ने आपके पिछवाड़े थर्मामीटर लगाया है। ध्यान रखिये कि मैं अभी भी शालीन भाषा ही प्रयोग कर रहा हूँ इसके लिये आपको किसी गिरीश मुकुल अंकल के पीछे खड़े होने की जरूरत नहीं है आप मुझसे सीधे भी बात कर सकते थे मुझमें साहस है सच बोलने और सुनने का तो मोबाइल नंबर दिया। कमेंट्स के प्रकाशित करवाने की ललक नहीं है लेकिन आप तक बात पहुंचाने का जरिया है तो इसे इस्तेमाल कर रहा हूँ । हमें किसी की समझाईश की आवश्यकता नहीं है भड़ास पर तो न जाने कितने चिरकुट आए और रगेदे गये। यदि आप चाहें तो मैं आपको अपना मंच "भड़ास" लिखने के लिये देता हूँ यदि आप सही पहचान के साथ सामने आएं तो मेरे खिलाफ़ भी यदि तर्क और तथ्य के साथ लिखें लेकिन किसी की भी माँ-बहन-बेटी-पत्नी आदि को गालियाँ दिये बिना तो स्वागत है। यदि समझ गए हों तो अच्छा है वरना आपको और दवा की जरूरत पड़ेगी जो कोई न कोई भड़ासी आप तक पहुंचा ही देगी। यकीन मानिये कि यदि आपको गोबर से होली में आनंद आता है तो हम आपको गटर में लेकर कस कर होली की तमन्ना पूरी कर देंगे।
जय जय भड़ास

तुझी आई चा नवरा आणि तू झालास कावरा-बावरा ने कहा…

काए रे दारी कौ जनों तैं कुत्ताचोद, जब भड़ासियन ने तेई बऊ कौ इतेक बेरा चोद डारौ तेई बऊ के संग तेओ बब्बा भी चोद डारौ भड़ासियन तो लगौ तैं फड़फड़ान नईं तो कैसों चुदुर चुदुर कर रओ हतौ। अरे तैं का माफ करैगो बिन औरन कौ कुत्ताचोद बिनई औरन ने तेई गाँड़ में डंडा आए डार कै हलाए दओ तो और का करहैं तैं सरीफ बनबे के सिवाए। डाक्टर साब के सामने जी दिना तैं आ गओ ना तो बौ दिना तेओ मूड़ गाँड़ एक समझ । तैं तो जनाई पड़ रओ कि गद्दार नत्थे खां के खानदान कौ है जाकी मूछैं बाई साब ने भून दई हतीं अंग्रेजन के संग लड़त बेरी । याद रखिये तैं कुतियाचोदू कि जी तरा को नीचपना तैने करो है बाको जबाब तो हमई औरे दे सकत। अब छाप दिओ जा कमेंट फादरचोद सरीफ बनबे कौ नाटक कर रओ ब्रदरचोद कऊं कौ :)
मजा गऔ हुइए अब तोए डंडा हलाए दओ मैने सो.......और नाप लई स्क्रूगेज से कि कित्ती मोटी तेई गाँड़ की चमड़ी और डिपिस्टिक से लै लई गहराई।
नेक मॉडरेसन हटाए के देख कि डंडा कित्ती जोर से हलात हैं हम औरें...... हा हा हा
हा हा हा
हा हा हा बिलात हंसी आ रई है हमैं तो जा कुत्ताचोद के ऊपरै
जै जै भड़ास

किलर झपाटा ने कहा…

कितना अच्छा मालुम दे रहा है, रूपेशजी, दिवस जी, ज़ील जी, और बनावटी भड़ासी ब्लॉगरों। मुझे तो बड़ा ही दुख हुआ, आप सबकी ये गन्दी गन्दी गालियाँ सुनकर छी छी छी बहुत ही घिने घिने लोग हो भाई आप।
एक प्रशांत भूष्ण की बात को आप लोग कहाँ से कहाँ ले गये। रूपेश जी तो अखाड़ा बाजी तक करने लगे। बहुत ही बेकार लोग है यार आप सब लोग। आप लोग सब अच्छी अच्छी बातें किया करो और न बने तो मुझसे सीखो। अब ये बुन्देलखण्डी लेंग्वेज में भी भड़भड़ाने लगे, मराठी हैडिंग के साथ। एक सीधे सादे ब्लॉगर के साथ ऐसा बिहेवियर ? वैरी बैड एण्ड सैड। जाइये इसके बाद भी मैं आप सभी को दीपावली के शुभ-अवसर पर माफ़ करता हूँ और दुआ करता हूँ कि अबकी बार दीपावली का त्योहार मनाते वक्त आपका मन पूजा-पाठ, सेलेब्रेशन आदि में न लगकर सिर्फ़ मुझमें ही लगेगा। यही सोचते रहेंगे आप लोग कि इसे और कौन कौन सी गालियाँ बना बना कर दे दें। है ना। वैसे सच सच बताइये भड़ासियों ? आज तक आपको कोई मेरे जैसे मिला था जो इतनी बात कर सके और आप लोगों का इतना खून जला सके जितना आप लोगों ने पिछले दिनों मेरे चक्कर में जलाया। ठी ठी।

डा.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) ने कहा…

हमारा खून तो इन्हीं हरकतों से बढ़ता है कि तुम जैसे मुखौटाधारियों को रगेद रगेद कर सही कर दिया जाए ताकि तुम सुर में बजने लगो। देखो कितनी जल्दी शराफ़त पर उतर आए वरना तो मुखौटे लगा लगा कर माँ-बहनों को गालियाँ दिये पड़े थे। आपको हर उस अंदाज में उत्तर देने को भड़ासी हमेशा तैयार हैं जिस भाषा में आप बोलेंगे। हमें माफ़ करने का आप ढोंग कर रहे हैं ये आपकी मजबूरी है वरना क्या उखाड़े ले रहे थे। मॉडरेशन का भय तो आपमें भी व्याप्त हो गया न..... अब हम सब हँस रहे हैं हा हा हा हा हा हा हा हा
जय जय भड़ास

شمس शम्स Shams ने कहा…

अबे ढक्कन ! हम लोग बनावटी भड़ासी ब्लॉगर नहीं बल्कि असलियत और नसलियत से भड़ासी हैं ये तुझे समझ आया होगा। न आया हो तो दवा की खुराक डॉ.साहब बढ़ा देंगे तब तू जरूर स्वस्थ हो जाएगा।
जय जय भड़ास

बुन्देलखंडी मरहैटों की दाई खैं चोदें हाथी ने कहा…

काय रे भड़सियों, बऊ के भोसड़ा हरों। तुम औरों नै का सोची के दारो मारो कुत्ताफ़ुत्ताचोद की चिल्लाचोट मचा दै हौ तौ झपाटा की गाँड़ फट जैबी। अबे तुम औरों की गाँड़ में डंडा नई बौ तौ लुघरिया डार डार बार दै है। दैखत तौ चलो। जादा स्यानपनों सूझन लगौ है तौ आ जाऔ तुमऊ मैदान मैं। तुम जा बुन्देलखण्डी चुपचाप धरै रै हो तौ तुमैरी भलाई है। ऊँसई काय मरे जा रए हौ आर, बीच बीच में। इन औरों खौं जौ झपाटै निपटा सकत है नई तौ जे औरें सबई को जीबो हराम कर के रखे हैं। एई सै गम्म खाए रहो। और पिटन देओ इन औरों खों झपाटा भैया से।
जै जै झड़ास।

akal ka dushman ने कहा…

badiya