सोमवार, 16 मई 2011

चित भी मेरी, पट भी मेरी, खड्डी मेरे बाप की


भाइयों,
हमारे ब्लॉगजगत में एक अज़ीम शख्सियत हैं मिस्टर रमेश कुमार जैन उर्फ़ "सिरफ़िरा"
अब जरा उनके प्रोफ़ाइल में उनके बारे में उनकी ही जुबानी पढ़ें आप लोग :-
"मेरे बारे में
मुझे अपराध विरोधी व आजाद विचारधारा के कारण ही पत्रकारिता के क्षेत्र में 'सिरफिरा' प्रेसरिपोर्टर के नाम से पहचाना जाता है.अन्याय का विरोध करना और अपने अधिकारों हेतु जान की बाज़ी तक लगा देना.हास्य-व्यंग साहित्य,लघुकथा-कहानी-ग़ज़ल-कवितायों का संग्रह,कानून की जानकारी वाली और पत्रकारिता का ज्ञान देने वाली किताबों का अध्ययन,लेखन,खोजबीन और समस्याग्रस्त लोगों की मदद करना.एक सच्चा,ईमानदार, स्वाभिमानी और मेहनती इंसान के रूप में पहचान. मै अपने क्षेत्र दिल्ली से चुनावचिन्ह "कैमरा" पर निर्दलीय प्रत्याक्षी के रूप में दो चुनाव लड़ चुका हूँ.दिल्ली नगर निगम 2007,वार्ड न.127 व उत्तमनगर विधानसभा 2008 के दोनों चुनाव में बगैर किसी को दारू पिलाये ही मात्र अपनी अच्छी विचारधारा से काफी अच्छे वोट हासिल किये थें.मेरी फर्म "शकुंतला प्रेस ऑफ़ इंडिया प्रकाशन" परिवार द्वारा प्रकाशित पत्र-पत्रिकाएँ-जीवन का लक्ष्य (पाक्षिक)शकुंतला टाइम्स(मासिक),शकुंतला सर्वधर्म संजोग(मासिक),शकुंतला के सत्यवचन(साप्ताहिक) ,उत्तम बाज़ार(त्रैमासिक)"शकुंतला एडवरटाईजिंग एजेंसी"द्वारा सभी पत्र-पत्रिकायों की विज्ञापन बुकिंग होती है.निष्पक्ष,निडर,अपराध विरोधी व आजाद विचारधारा वाला प्रकाशक,मुद्रक,संपादक,स्वतंत्र पत्रकार,कवि व लेखक"
अब सुनिये,
धर्म निरपेक्षता और देशप्रेम से ओतप्रोत एक बहुत अच्छी और उम्दा पोस्ट लिखने के बाद भी ये मिस्टर अपनी पोस्ट को एडवरटाइज़मेंट की स्टाइल में सभी के ब्लागों पर जा जाकर निम्न टिप्पणियों के रूप में पेल रहे हैं:- (१)   श्रीमान जी, क्या आप इस नाचीज़ अनपढ़ व ग्वार इंसान की परेशानी समझ सकते है? तब आप अपने ब्लोगों पर हिंदी का विजेट लगा दें. आपकी पोस्ट पढता हूँ मगर समस्याओं के कारन बगैर टिप्पणी के लौट जाता हूँ. आप क्यों भूल रहे हैं कि-राष्ट्र के प्रति हर व्यक्ति का पहला धर्म है अपने राष्ट्र की राष्ट्रभाषा का सम्मान करना. जब आप पोस्ट हिंदी में लिखते हैं तब गुड खाकर गुलगलों से परेहज क्यों? गुस्ताखी माफ़ करें. टिप्पणी पढ़ते ही हटा देना. एक मेरा मीडिया को लेकर छोटा-सा अनुभव-एक किसी नेहा कक्कड़ ने आत्महत्या की और प्रिंट व टी.वी. चैनल ने इन्डियन आइडल फेम नेहा कक्कड़ की न्यूज चलाई और प्रिंट की. उनका घर पास था और मेरे समाचार पत्र के मेम्बर होने के कारण खोजबीन की. पूरा डाटा तैयार किया और उन सभी को लिखित में माफ़ी मांगने के लिए मजबूर कर दिया था. न्यूज जल्दी के चक्कर में खोजबीन करना पत्रकार आज भूलते जा रहे हैं, क्योंकि भौतिक वस्तुओं की चाह ने उनको उद्देश्यहीन कर दिया है. मैं पत्रकारों के ही स्टिंग ओपरेशन करता हूँ. इसलिए खुद को "सिरफिरा" कहलाता हूँ, क्योंकि सम्मानजनक पेशे में पत्रकार के नाम पर कुछ भेड़िये घुस गए और इनका सफाया हमें ही करना होगा. अगर आप चाहे तो मेरे इस संकल्प को पूरा करने में अपना सहयोग कर सकते हैं. आप द्वारा दी दो आँखों से दो व्यक्तियों को रोशनी मिलती हैं. क्या आप किन्ही दो व्यक्तियों को रोशनी देना चाहेंगे? नेत्रदान आप करें और दूसरों को भी प्रेरित करें क्या है आपकी नेत्रदान पर विचारधारा
 
(२)   प्रिय दोस्तों! क्षमा करें.कुछ निजी कारणों से आपकी पोस्ट/सारी पोस्टों का पढने का फ़िलहाल समय नहीं हैं,क्योंकि 20 मई से मेरी तपस्या शुरू हो रही है.तब कुछ समय मिला तो आपकी पोस्ट जरुर पढूंगा.फ़िलहाल आपके पास समय हो तो नीचे भेजे लिंकों को पढ़कर मेरी विचारधारा समझने की कोशिश करें. दोस्तों,क्या सबसे बकवास पोस्ट पर टिप्पणी करोंगे. मत करना,वरना......... भारत देश के किसी थाने में आपके खिलाफ फर्जी देशद्रोह या किसी अन्य धारा के तहत केस दर्ज हो जायेगा. क्या कहा आपको डर नहीं लगता? फिर दिखाओ सब अपनी-अपनी हिम्मत का नमूना और यह रहा उसका लिंक प्यार करने वाले जीते हैं शान से, मरते हैं शान से श्रीमान जी, हिंदी के प्रचार-प्रसार हेतु सुझाव :-आप भी अपने ब्लोगों पर "अपने ब्लॉग में हिंदी में लिखने वाला विजेट" लगाए. मैंने भी लगाये है.इससे हिंदी प्रेमियों को सुविधा और लाभ होगा.क्या आप हिंदी से प्रेम करते हैं? तब एक बार जरुर आये. मैंने अपने अनुभवों के आधार आज सभी हिंदी ब्लॉगर भाई यह शपथ लें हिंदी लिपि पर एक पोस्ट लिखी है.मुझे उम्मीद आप अपने सभी दोस्तों के साथ मेरे ब्लॉग एक बार जरुर आयेंगे. ऐसा मेरा विश्वास है. क्या ब्लॉगर मेरी थोड़ी मदद कर सकते हैं अगर मुझे थोडा-सा साथ(धर्म और जाति से ऊपर उठकर"इंसानियत" के फर्ज के चलते ब्लॉगर भाइयों का ही)और तकनीकी जानकारी मिल जाए तो मैं इन भ्रष्टाचारियों को बेनकाब करने के साथ ही अपने प्राणों की आहुति देने को भी तैयार हूँ. अगर आप चाहे तो मेरे इस संकल्प को पूरा करने में अपना सहयोग कर सकते हैं. आप द्वारा दी दो आँखों से दो व्यक्तियों को रोशनी मिलती हैं. क्या आप किन्ही दो व्यक्तियों को रोशनी देना चाहेंगे? नेत्रदान आप करें और दूसरों को भी प्रेरित करें क्या है आपकी नेत्रदान पर विचारधारा? यह टी.आर.पी जो संस्थाएं तय करती हैं, वे उन्हीं व्यावसायिक घरानों के दिमाग की उपज हैं. जो प्रत्यक्ष तौर पर मनुष्य का शोषण करती हैं. इस लिहाज से टी.वी. चैनल भी परोक्ष रूप से जनता के शोषण के हथियार हैं, वैसे ही जैसे ज्यादातर बड़े अखबार. ये प्रसार माध्यम हैं जो विकृत होकर कंपनियों और रसूखवाले लोगों की गतिविधियों को समाचार बनाकर परोस रहे हैं.? कोशिश करें-तब ब्लाग भी "मीडिया" बन सकता है क्या है आपकी विचारधारा?   अमाँ यार सिरफ़िरे भाई , दूसरों के सर पे चढ़ कर अपनी पोस्ट पढ़वाओगे क्या ? मरे जा रहो एकदम से। हाँ नहीं तो । ये मीडिया का पक्का असर लगता है आप पर।  अरे जिसकी पोस्ट पढ़ रहे हो उस पर उस से संबंधित टीप करो भाई तो समझ में आता है मगर आजकल ब्लॉगरों में  भी ओबामा और अमरीका की तरह ये चलन आम है कि  -  
चित भी मेरी, पट भी मेरी, खड्डी मेरे बाप की
अपनी धौंस जमा ली मैनें, तेरी पत्ती साफ़ की    है ना  ? बोलो बोलो .............................. हा हा

शुक्रवार, 6 मई 2011

दि ग्रेट परशु - झपाटा

भगवान परशुराम की जय 
अक्षय तृतीया महापर्व पर आप सभी ब्लॉगर बंधुओं को बहुत बहुत शुभकामनाएँ एवं बधाइयाँ


और उनका दि ग्रेट परशु-झपाटा


जय हो प्रभॊ आपकी

सोमवार, 25 अप्रैल 2011

बिक गई तो फिर न मिलूँगी कभी नहीं कभी नहीं कभी नही............................शरम करो रे कोई

इन दिनों ब्लॉगजगत में ३० अप्रैल २०११ को लेकर बड़ी गहमा गहमी है। अरे हिन्दी ब्लॉगरों बमुश्किल पुरस्कार मिलने की बेला आई है, यार इट्स नॉट अ जोक। डॉ. जमाल तो बेचारे भड़भूँजे की दूकान में जाकर खुद को भुँजवा के भी आ चुके हैं इसी बात पर एण्ड यू ऑल आर ऑल नॉट अवेअर ? वण्डरफ़ुल ! खैर मैं तो जनाब फ़लाँ फ़लानापति और ढमके ढम्कात जी की बात कर रहा हूँ। यस इन दोनों ने एक बहुत ही अमके किस्म की किताब इस आयोजन को देखते हुए सबसे बिना पूछे पब्लिश कर ली है और सबके मुँह में ठूँस ठूँस कर बेच रहे हैं। अरे भैये ये लोग पहले समीर लाल की "देख लूँ तो चलूँ" को तो पचा लें तब न तुम्हारी खरीदेंगे ? अजीरन करवाओगे क्या ? बोथ ऑफ़ यू नॉटी बॉयज़। और ये लोग उस किताब में मेरा नाम छापने के लिये पैसा माँगते थे। अब भाई लोग आप ही बताओ मेरे पास झपाटे के सिवा और है क्या ? हा हा। कैन यू गैस मैंने क्या दिया होगा ? हा हा
 ये चर्चा नहीं जानी पर्चा है।
अरे ज्ञानदत्त जी, हँसिये मत ना मुझे भी हँसी आ जाती है ऐसे में। 
हाँ नहीं तो।

रविवार, 24 अप्रैल 2011

मुझे देखकर खिसक जाती है डॉ. अनवर जमाल की हवा.........................हा हा

ना जाने क्यों ब्लॉगजगत के सबसे बड़े हिन्दू-मुस्लिम दंगाई डॉ. अनवर जमाल की हवा खिसक जाती है मुझे सामने देखकर। मेरी टिप्पणी को वो सब काम छोड़ कर मिटाने आ जाते हैं। मुझे भाभी जी (मिसेज अन्वर जमाल) ने बतलाया कि किलर भाईजान, आप इन्हें क्यों इतना सताते हो बताइये आजकल कब्ज हो गई है इनको। मैने पूछा अरे इसका मेरे सताने से क्या संबंध ? वे बोलीं संबंध कैसे नहीं दिनभर नैट पर बैठकर उल्टी सीधी वाहियात पोस्टें लिखते रहते हैं और लैटरिन जाते ही फ़ौरन बाहर आ जाते हैं कि कहीं उस पोस्ट पर किलर झपाटे ने कोई टिप्पणी तो नहीं कर दी वरना लोग खिल्ली उड़ायेंगे इनकी बेवकूफ़ाना काबिलियत पर। आपकी टिप्पणी मिटा मिटा कर हाथ में छाले पड़ गये हैं इनके। हीही ।
अब आप लोग ही बताइये यार इसमें मेरा क्या कसूर है। मैने तो कल इनके हैप्पी बड्डे पर जो बधाई दी थी उसे भी इन्होंने मिटा दिया। पुराने बुजुर्ग कहते हैं कि किलर झपाटे की बधाई हमेशा स्वीकार लेनी चाहिये नहीं तो साल पर लोग गरियाते रहते हैं। अब आगे साल भर इनका भगवान, सॉरी ये तो अल्ला मियाँ वाले हैं ना, तो अल्लाह ही मालिक है। हा हा। 
एक नई कहावत नाजिल हुई अभी अभी मेरे ऊपर :-
अल्ला रखे खयाल तो गधा भी डॉ. जमाल

और तो और मुझे अपने ब्लॉगों को फ़ालो करने से भी ब्लॉक कर रखा है।
 हा हा खतम हो गये जमाल बाबू हार गया मुसलमान ।


रविवार, 17 अप्रैल 2011

क़ुरबानी का बकरा सलीम ख़ान और उसके प्यारे इब्राहीम के गप्पोड़ी खाब

एक बार पैग़म्बर इब्राहीम (अ.) के ख़्वाब में आया कि तुम अपनी सबसे ज्यादा अज़ीज़ चीज़ अल्लाह की राह में क़ुर्बान करो तो उन्होंने तमाम चीज़े दान की, बहुत सारे जानवर अल्लाह के राह में क़ुर्बान किये. मगर उन्हें लगातार ख़्वाब आते रहे और वो क़ुर्बान करते रहे. फ़िर उन्होंने सोचा कि मुझे तो सबसे ज्यादा अज़ीज़ मेरा बेटा (इस्माईल अलैहिस्सलाम) ही है.

तो उन्होंने इसका तज़किरा इस्माईल (अ.) से किया तो उन्होंने कहा कि जब अल्लाह हुक़म है तो आप उस पर ज़रूर अम्ल में लायें, मैं तैयार हूँ.

इब्राहीम (अ.) ने फ़िर अल्लाह के हुक्म के मुताबिक़ अपने प्यारे और सबसे अज़ीज़ बेटे इस्माईल (अ.) को  क़ुरबानी के नियत से उन पर छुरी चलाई. लेकिन छुरी को अल्लाह का हुक्म हुआ कि वह उनके प्यारे पैग़म्बर का बल भी बांका न करे. इस तरह स्वर्ग से एक दुम्बा आया जो इस्माईल (अ.) की जगह पर आ गया और वह कुर्बान हुआ. मैं बताता चलूँ कि इब्राहीम (अ.) की इस अदा हो और फ़रमाबरदारी को इतना पसंद फ़रमाया कि क़यामत तक इसे मुसलमानों पर फ़र्ज़ कर दिया. जिसे मुस्लिम लोग बकरा-ईद के रूप में कुर्बानी देकर मानते हैं.

अब सुनो भैया लोगों,
शंकर भगवान ने गणेश जी की गर्दन काटकर हाथी की गर्दन जोड़ी तो  सलीम खान जो कि ठीक से अपने दिमाग का स्क्रू तक नहीं जोड़ पाते कहते हैं कि ये गप्प है ऐसा हो नहीं सकता। 

दूसरी तरफ़ इनके अल्ला मियाँ जिनकी एक ठो ढंग की तस्वीर तक इनके पास है नहीं, वह छुरी को जिसमें जान भी नहीं है को हुक्म देते हैं कि वह उनके प्यारे पैग़म्बर का बल भी बांका न करे और हिन्दुओं के स्वर्ग से एक दुम्बा भेजते हैं (क्योंकि इनके मुसलमानों में जन्नत वन्नत तो होती ही नहीं है ना हा हा) जो इस्माईल (अ.) की जगह पर आ गया और वह कुर्बान हुआ.हा हा। सब का सब आटोमेटिक ? वैरी स्ट्रेंज। दिल्लगी बहुत है इस्लाम में। हा हा।
अरे सीधे क्यों नहीं कहते कि यार के उस दिन मटन खाने का बहाना चाहिये होता है और कुछ नहीं। कुर्बानी वुरबानी का फ़ालतू बहाना क्यों करना है के नहीं।
एक बात बताऊँ सलीम, जमाल और बुल्ले (हरीश) मियाँ,  आपके अल्ला मियाँ जिस दिन आपकी कुर्बानी सच में कुबूल फ़रमा गये और एक आध दुम्बा भी उन्होंने अपने हलक में उतार लिया ना तो आप लोग ही सब के सब अपने अपने दुम्बे लेकर भाग छूटोगे ये कहके कि आज से अल्ला मियाँ ने मुसलमानों पर ये फ़र्ज़ आयद किया कि अब वे दुम्बे की जगह अपनी औकात के मुताबिक मच्छरों की कुरबानियाँ दिया करें।

हा हा हा।

शनिवार, 9 अप्रैल 2011

कुमार विष-वास और जबलपुर वालों में ठनी

ओय पहलवानों संभल जाओ रे,
ये कुश्ती तो लगता है नये रंग दिखायेगी। एक हफ़ते के मुम्बई टूर के बाद हाँगकाँग लौटा तो ब्लॉगवुड कुछ बदला बदला दिखा। जमाल डाक्टर और सलीम को हमारी वाणी के झटके वगैरह के बीच आज की ताजा खबर  ये मिली के हरदिल अजीज कुम्मू भैया याने कुमार विश्‍वास बड़ी मुश्किल से इंडिया प्रवास किया और वो एम.पी. के जबलपुर। भाई साहब की पुरानी आदत है हंगामा करने की और शायद वहाँ भी वही कर आये हैं एक दो ब्रीफ़ टाइप की पोस्टें पढ़ने मिलीं जिसमें कुछ बड़ों की टिप्पणियों से समझ में आ रहा है कि दिस कुमार इस नॉट एट ऑल विश्‍वास के लायक बिकॉज़ उसके अंदर विष वास करने लगा है आजकल।
एम आय राँग ? डिटेल तो पोस्ट लिखने वाले ब्लागर्स ही बता पायेंगे। बट आय थिंक समथिंग बैड हैज़ हैपेंड देयर। गैट आयडिया प्लीज़।

मंगलवार, 22 मार्च 2011

जिस हमारीवाणी में डॉ. अनवर जमाल, सलीम खान जैसे इस्लामी कट्टरवाद फैलाने वालों को हटाने का माद्दा न हो, उसके मार्गदर्शक मंच में पूरा हिन्दुस्तान जुड़ भी जाये तो क्या है?

जिस हमारीवाणी में डॉ. अनवर जमाल, सलीम खान जैसे इस्लामी कट्टरवाद फैलाने वालों को हटाने का माद्दा न हो,  उसके मार्गदर्शक मंच में पूरा हिन्दुस्तान जुड़ भी जाये तो क्या है ?
कभी फुरसत निकाल कर उनके काँटेदार ब्लागों पर भी नजर मार लिया कीजिये और फिर अंतर्मथन कीजिये खुशदीप जी, दिनेशजी, सतीश सक्सेना जी, समीरलालजी, बवाल जी, गिरीश बिल्लोरे जी, ललितजी, ताऊजी, मासूम जी, गीता जी, महफ़ूज अली जी, अनूप जी, दिव्या ज़ील जी आदि आदि महान ब्लॉगरगण। क्योंकि आप सबने मिलकर जो भी मॉरल पुलिसिंग मेरे अगेन्स्ट की है वो सरासर पार्शलिटी है।
गॉड इज़ नॉट गोईंग टु माफ़ यू ऑल फ़ॉर दिस।