मंगलवार, 15 मार्च 2011

दिनेश जी, हमारीवाणी इज़ अ बेकारीवाणी

ब्लॉगजगत में शुचिता लाने के लिए ही मैनें जस की तस टिप्पणियाँ रखी थीं। मगर अधीरता के चलते कुछ  ब्लॉगर लोग और हमारीवाणी इसे समझ नहीं सके और मुझे हटा दिया। मत घबराइये। जल्द ही एक एग्रीगेटर और आने वाला है जो चिट्ठाजगत जैसा ही होगा और वहाँ किसी ब्लॉगर के साथ इस तरह का सलूक करना किसी के बस में नहीं होगा।
मैने कभी भी किसी को गाली नहीं दी। मैं तो बतलाना चाहता था कि देख लो ब्लॉगरों यहाँ लोगों के दिलों में क्या क्या गंदगी है ? मगर आप लोगों ने वो करने ना दिया।
और अब ये जस्टिफ़िकेशन वाले लेख लिखने की आप लोगों को भी क्या जरूरत है बार बार ? बतलाइये ना दिनेश जी ?
मेरी नजर में तो बिल्कुल बेकार है आप लोगों की यह हमारीवाणी, जिसमें दिन भर कुछ लोग बस हिन्दू मुस्लिम दंगा मचाए रहते हैं और है क्या वहाँ ? शेम शेम।

19 टिप्‍पणियां:

बेनामी ने कहा…

अबे झपाटे ये दिनेश कौन है? कहीं ये दिव्या मैडम की राधिका की तरह तेरा कोई जिगरी यार तो नहीं है.
तू कहीं दिनेशराय वकील साब की बात तो नहीं कर रहा?
हमारीवाणी का नाम तो हरामीवाणी होना चाहिए. हा हा हा. इसमें हराम की औलाद अनवर जमाल सबसे बड़ा चोदू ब्लौगर है.

बेनामी ने कहा…

भोसड़ी के क्या ये जरूरी है कि लोगों के दिल में जो हैं वो सबको दिखाया जाए ? गंदगी दिखानी क्या जरूरी है ? मैं तेरी बहन की चूत देखना चाहता हूँ दिखाएगा तू ? साले अकल है तेरे में ?

किलर झपाटा ने कहा…

मेरी कोई बहन ही नहीं है तो क्या देखोगे बेनामीभाईसाहब। और सुनो आप लोग सब आ आ करके मेरे ब्लॉग पर हग्गू करते रहोगे और चाहोगे कि मैं उसे साफ़ करूँ ? याने गन्दी टिप्पणियों को डीलिट कर करके अपने हाथ खराब करूँ ?
धिस डसेंट सूट्स मी। आफ़्टर‍ऑल आय एम अ पहलवान। आप लोगों के विचार कितने कुत्सित हैं यार छी छी छी। मुझे गाली मत दो प्लीज़। जमाल जी ने तो ब्लॉगिंग से इसी वजह से दुखी होकर सन्यास ही ले लिया। कितने रंज की बात है यह।
आप लोग सुबह उठकर योग वगैरह किया कीजिए उससे आपका मन निर्मल होने लगेगा मेरी तरह। अच्छे अच्छे काम करें और अच्छी बातें करें तो आपको सभी लोग अच्छे लगेंगे। ओ.के.। आप सबको नमस्कार और हैप्पी होली।

बेनामी ने कहा…

चोदू झपाटे,
तेरी ऐसी की तैसी। तू इस टाइप की क्न्ट्रोवर्शियल पोस्ट लिखता ही क्यों है बे भोसड़ी के ? अपनी हर पोस्ट में झगड़ा रोप देता है और बाद में बड़ा शालीन बन जाता है गाँडू कहीं का।

सज्जन कुमार ’नेपाली’ ने कहा…

अबे झपाटे,
जमाल की गाँड़ पे रंदा तो तूने ही फेरा है बे यहाँ तक कि उसकी गाँड़ पे प्याज तक काटी है और अब मगरमच्छ के आँसू बहा रहा है उसके नाम पर। बहुत मादरचोद है बे तू। जमाल तो सच सज्जन आदमी है मगर तूने उसका जी हराम कर रखा था इसीलिये उसने सन्यास ले लिया ब्लागिंग से। तेरा सत्यानाश जाये।

बेनामी ने कहा…

सुनिये झपाटा भैया,
आप मेरे ब्लॉग पर आये इसीलिए मैं भी यहाँ चला आया। यहाँ देखा तो बहुत ही गंदा महसूस हुआ। आपकी मैनें कई जगह टिप्पणियाँ देखीं। आपने कहीं भी अश्लील या खराब टिप्पणी नहीं की है। हाँ चिढ़ाते विढ़ाते जरूर दिख रहे हो कहीं कहीं। पर यहाँ काहे इतनी घटिया बातों को जगह देते हो ? मिटा दो यार ये सब। या फिर माडरेशन आन तो रखा करो। लोग आपको छूट गालियाँ देते रहते हैं आपको बुरा नहीं लगता ? देखिए मैं भी बेनामी बनकर ही टिप्पणी कर रहा हूँ क्योंकि मुझे डर है कि आपके यहाँ कोई मेरे ही पीछे ना पड़ जाये।

किलर झपाटा ने कहा…

लोगों ने मुझसे कहा-
"यदि आप अपने ब्लाग और टिप्पणियों की भाषा को मर्यादित रखें तो आप हमारीवाणी में फिर से लौट सकते हैं।"
अब आप लोग ही बताइये भला ? क्या अपने ब्लॉग पर टिप्पणियाँ मैं देता हूँ? और मेरे ब्लॉग की पोस्टों में मैने कभी लिमिट से बाहर जाकर बात लिखी है?
जाने दो भैया मुझे मालुम पड़ चुका है कि मुझे हमारीवाणी से हटवाने के पीछे किन किन बड़े बड़े ब्लॉगरों का हाथ है! दुख की बात ये है कि मैं तो उन सभी का बहुत सम्मान करता हूँ मगर उन्होंने फिर भी मुझे हटवा दिया।

बेनामी ने कहा…

Dear Mr. Jhapata,
happy holy to you also.
I am a girl and that is why not disclosing my name here. Why don't you remove all this rubbish from your comment folder. I think you are a nice fellow but.
I will send you e-mail o.k. By by.

G.N.SHAW ( B.TECH ) ने कहा…

बेहद मजा आया ..आप को होली की हार्दिक बधाई !

अरविन्द मिश्र ने कहा…

झपाटा जी, होली की हार्दिक मुबारकबाद.
एक और बेहद उम्दा बात कही आपने. मैंने तो पहले भी कहा है कि आपने खुद कहीं भी गन्दी टिप्पणियां नहीं की हैं और यही कारण है कि आप मेरे आदर्श ब्लॉगर हैं. जमाल जी ने ब्लागिंग से इस्तीफ़ा दे दिया यह जानकर ख़ुशी नहीं हुई. परन्तु जो होना रहता है वह होकर रहता है. यही खुदा की कुदरत है.
झपाटा जी, एक बार फिर से होली की मुबारकबाद. ऐसे ही अलख जगाये रखिये.
किलर झपाटा जिंदाबाद.

अहसास की परतें - समीक्षा ने कहा…

कृपया जापान के प्रकृतिक आपदा का उपहास उडाने वालों के विरुद्ध मेरा साथ दे इस पोस्ट पर http://ahsaskiparten-sameexa.blogspot.com/2011/03/blog-post.html

बेनामी ने कहा…

जाकिर अली रजनीश साला एक नंबर का मादरचोद है
हमेशा साला हिँदु त्यौहारो का मजाक उड़ाता है.
ज्योतिष का मजाक उड़ाता है
भोसड़ी वाला कहता है कि होली मे पेड़ो की हत्या हो रही है.
अबे मादरचोद जाकिर अली.
होली मे पेड़ो की केवल शाखाये काटी जाती है. पूरा पेड़ नही काटा जाता है.
साले गांडू तेरी तरह नही की कुर्बानी के नाम पर लाखो बेजुबान जानवर की हत्या कर दी जाती है
ये सारे मुल्ले बहुत हरामी है

बेनामी ने कहा…

अरे जाकिर अली रजनीश तो जमालगोटा की नजायज औलाद है

Arvind Mishra banaraswale choot ka paani bechne wale ने कहा…

jakir ali, apni maa ke bhonsde ko roj chatta hai. apni maa ki choot mein ungli daal kar soonghta hai phir ungli chatta hai.


us se bada maadarchod aur chhot ka chatora koi nahi hai.

हिन्दी ब्लॉगजगत से उक्ताए हुए लोग ने कहा…

हा हा ये ब्लाग तो बहुत ही बड़ी कम्यूनिटी सर्विस कर रहा है यार। जिसको जिसके विरुद्ध जो कुछ बकना हो यहाँ आकर खुशी खुशी बक सकता है। वाह वाह किलर झपाटे जी। आपका जवाब नहीं। वैसे एक बात कहें ? आपने बात तो १०० फीसदी पते की ही कही है। चाहे वो हमारीवाणी के बारे में हो या टिप्पणियों के माडरेशन के बारे में। आप एकदम सही हैं और हम आपके साथ हैं। आपको होली की बहुत बहुत शुभकामनाएँ।

बेनामी ने कहा…

अबे बहन के लंड झपाटे, मादरचोद तू लखनऊ की किस गली में अम्मा चुदवाता फ़िरता है हमे सब मालूम है। तेरी अम्मा को गधे के लौडे से नही चुदवा दी तो हमारा भी नाम नही। भौसडी के तू जितना होशियार बनता है उतना है नही। और अब ये मत कहना कि तेरे बहन नही वैसे ही अम्मा भी नही है। अब तू कहेगा तेरी अम्मा मर गई तो बहन के लौडे ऊपर नरक में भी जाना पडे पर तेरी अम्मा को गधे से लखनऊ की गली गली में नही चुदवाया तो हमारा नाम नही।

चल ले जितनी चाल तू चल सकता हो। तेरे दूसरे ब्लाग भी हमारी नजर में हैं।

किलर झपाटा ने कहा…

प्यारे बेनामी जी,
ये बताइये कि आप मुझपर इतने क्रोधित क्यों हैं ?
भाई मैं तो किलर झपाटा के रूप में एक निर्देह रचना मात्र हूँ तो मेरे रिश्तेदार कोई भला कैसे हो सकते हैं ? है ना !
इसीलिये आपकी ये रिश्तेदारी वाली गालियाँ मुझपर लागू ही नहीं होती। मेरा दूसरा कोई ब्लॉग भी नहीं और मैं अब बनाना भी उचित नहीं समझता क्योंकि मेरे एक ब्लॉग को ही लोग इतनी नज़र लगाये हुये हैं तो और ब्लॉगों का क्या होगा ........?
और ये लखनऊ आपने कैसे पकड़ लिया यार एकदम करेक्ट ! वण्डरफ़ुल!
जो बात आप मेरे लिये कह रहे हैं वो आपने लखनऊ की गलियों में खुद पर टेस्ट कर ली हैं या नहीं वरना ऐन वक्त पर आपका गदहा जवाब दे जाये। आखिर लखनऊ का गदहा जो ठहरा।
हा हा ठी ठी।
और मुझे होशियार बनने की जरूरत ही क्या है जब आप जैसे डेढ़ हो-सियार ब्लागजगत में मौजूद हों। हा हा। और मैं क्या चाल रहा हूँ भाई ? सीधी सीधी पोस्टें ही लिख रहा हूँ। आप लोग बेकार नारज़ हो रहे हैं मुझपर।
अरे बेनामी जी छोड़िये ना, क्यों आप क्रोधाग्नि में जलकर अपना ब्लड बर्न कर रहे हैं। काम डाउन ना। चलो हैप्पी होली ओ.के.।

आऊ ने कहा…

आऊ,
ये किल्लू ने तो बड़ी शालीनता से बेन्नू की मैया चोद दी। ये झपाटा कहीं हमारा राजा भैया(गोविन्दा) तो नहीं ?????
आऊ,
आऊ आऊ आऊ

ताऊ रावणपुरिया ने कहा…

अबे आऊ चुपकर। शट‍अप।
कुछ भी बकबक करता है।
मेरे रहते हुए तू आऊ कैसे यहाँ।
लगाऊँ क्या एक झपाटा।
यू महा-आदर-चोट।