मंगलवार, 8 नवंबर 2011

किलर के एक ही झपाटे ने बड़े बड़े भड़ासियों को बनाया चिलरन

प्यारे पयारे ब्लॉगर बंधुओं,


ज़ील का झपाटे से प्रेम प्रसंग उजागर होने के बाद झपाटे से जलन रखने वालों की तादाद में भारी इजाफ़ा हुआ है। दिवस, मुनेन्द्र, दीनबन्धु, अमित, हिजड़ा झोलाछाप रुप्पू रूपेश इतिश्री वास्तव, हिजड़ा मनीषा, यूसलैस अनूप मंडल, और खरदूषण जैसे नामी गिरामी योद्धाओं ने किलर झपाटे पर नाना प्रकार के वार किये। मगर सबके सब भोथरे साबित हुए। इस महान पहलवान के किसी भी दाँव का उचित प्रत्युत्तर देने के बजाय इन्होंने उसे गूगल भर में खोजते रहने, कि ये कौन है ? कहाँ का है ? बड़े शहर का है ? छोटे शहर का है ? और उसकी शानदार अँग्रेजी पर प्रश्नचिन्ह लगाते रहने के अलावा कोई तीर नहीं मारा। इंग्लिश में रूपेश एण्ड कम्पनी बहुत कमजोर समझ में आ रही है। क्या करें इन बेचारों के माँ-बाप ने पढ़ाने की कोशिशें तो बहुत की लेकिन इन महामूर्खों को वाहियात बातों से फ़ुरसत मिले तब ना। पहले एक एक जने मोर्चा संभालते रहे फिर बात न बनी और पिछ्वाड़े मार खा खा कर सूज गये तो सबके सब इकट्ठे चढ़ दौड़े झपाटे को अभिमन्यू समझ कर मगर गलती से वो भीम निकल गया। हा हा। अब इन लैंगिक विकलांग्स को भागते गली नहीं मिल रही भायखला की। हर तरह से पिटे झपाटे से और उसके सामने ये अपने मुँह मियाँ मिट्ठू भड़ासी, चिलरन (बच्चे) साबित हुए। झपाटे का नाम यू आर एल में डाल कर यहाँ वहाँ छ्द्म रूप से उल्टी सीधी टिप्पणियाँ करके जीत की खुशी मनाने वाले जल्द ही हैरत में पड़ेंगे जब कोई इनके नाम यू आर एल में डालकर  पूरे ब्लॉगजगत में अश्लील टिप्पणियाँ करके आ जायेगा। हा हा। आय विल नॉट बि रिस्पॉन्सिबिल फ़ार द कॉन्सीक्वेन्सेस दैन।
एक ही बात का दुख है यार मगर झपाटे को। वो ये कि भड़ास जैसे नामचीन ब्लॉग पर इन लैंगिक कम मानसिक विक्लांग्स का कब्जा है।


है है झड़ी हुई भड़ास।    

24 टिप्‍पणियां:

डा.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) ने कहा…

यदि सचमुच अपने बाप की पैदाइश है और तेरी माताजी ने तुझे दूध पिलाया है तो बस सामने आ जा एक बार और देख ले कि तू कितना बड़ा भीम है। इस मंच पर खुले आम घोषणा कर रहा हूँ कि भड़ास जिस पर तेरी नजर है वो तुझे सौंप दूँगा। तुममें अगर साहस है तो भड़ास कि सदस्यता लेकर मेरे खिलाफ़ लिखो जो शिकायत है। तुम्हें प्रसिद्धि चाहिए जिसके लिये तुम ये टोटके कर रहे हो तो मुझे उससे कोई परेशानी नहीं है। मैं गुमनाम लोगों के साथ ही भला हूँ तुम बने रहो सेलेब्रिटी और कमा लो नाम ब्लॉगजगत में पर ध्यान रखना कि जीवन ऑफ़लाइन होता है और भड़ास एक जीवन शैली है सिर्फ़ एक ब्लॉग नहीं जो कि तुम जैसे मुंह छिपा कर जीने वाले कभी नहीं जी सकते। फिर कहता हूँ कि मुंबई आकर मिलने का साहस हो तो जरूर मिलना ।
जय जय भड़ास

किलर झपाटा ने कहा…

अँग्रेजी को देवनागरी में इसीलिये लिख रहा हूँ बच्चों कि तुम लोगों को आसानी से समझ आ जाये। बाकी ९९ प्रतिशत जो हिन्दी में लिख रहा हूँ वो दिखाई नहीं देता क्या ? अरे रुप्पू खुद का नाम क्यूँ फिर Engalish में भी लिख रखा है ? अन्य भड़ासियों पर अपनी श्रेष्टता दिखाने के लिये ? बात करते हो शास्त्रार्थ करने की। वो तो बन रहा नहीं पहलवान से दो दो हाथ करने चले हैं। सुबह हगने भी आजकल अँग्रेजी टॉयलेट (कमोड) में जाने लगे हो क्योंकि घुटने जवाब दे चुके हैं तुम्हारे और तुम मुझे लड़ोगे कह रहे हो सामने आ जा। मैं सिर्फ़ तुम्हारी कलाई भर थाम लूँगा झोलू तो लिगामेंट रप्चर हो जायेंगे कहीं कहीं के तुम्हारे। अण्डर्स्टुड। इससे अच्छा मित्रता का हाथ बढ़ाओ, फ़ायदे में ही रहोगे। जब मुझे अपनी बहिन बना सकते हो, तो स्नेह के दो बोल बोल कर मित्र नहीं बना सकते। बड़े आये डॉक्टर, हाँ नहीं तो। तुम्हें भड़ास छोड़कर जाने की जरूरत नहीं है रुप्पू भाई। लगता है मेरी बातों ने अब तुम्हारे दिल को ठेस लगाना शुरू कर दिया है। मैं पहलवान हूँ, चुहलबाज भी हूँ मगर इतना नीच भी नहीं कि किसी की आत्मा कल्पाऊँ। जाओ तुम लोग सब अब दोस्त हुये मेरे आज से। मुन्नू, दिवस, जील, हिजड़ा हायनेस, अनूप, और भड़ास अब तो हँस दो यार। क्या मुँह बनाये बैठे हुये हो। गधऊ हो सब के सब। पूरे मजाक को इतना सीरियसली ले रहे थे, उल्लू जैसे। "तू ऐसा तू वैसा" हा हा। आऊँगा भैया मुम्बई तो घर ही है मेरा। मगर लड़ने नहीं हँसी खुशी मिलने।

आदरणीय डॉक्टर साहब मुस्कुरा दो यार अब तो। हा हा।

किलर झपाटा ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
भडासियों के दोगलेपन और दुष्टता का एक पुराना पीड़ित , ने कहा…

@झपाटा जी , आपको सलाम करने का दिल चाहता है ,आपने जिस तरह से अकेले ही इन घटिया और दोगले भडासियों को सबक सिखाया है उसका मैं कायल हो गया हूँ वरना मुझे तो लगा था की इन कुत्तों को कोई चुप ही नहीं करा सकता लेकिन आपने अकेले ही इन सबके पिछवाड़े में जो मिर्चियाँ घुसायीं हैं वो आपकी काबिलियत को बखूबी दर्शाती हैं ,आपको मेरा शत-२ नमन

भडासियों के दोगलेपन और दुष्टता का एक पुराना पीड़ित , ने कहा…

दो शब्द डॉ. साहब से भी ,


क्यूँ @डॉ .साहब क्या हाल है ,झपाटे जी ने आपको आप ही के लहजे में जवाब दिया तो मिर्ची लगी गए , हो गयी आपकी और आपके भडासी कुत्तों की झंड , और वो भी सिर्फ एक अकेले व्यक्ति से............... हा हा हा .............लगता है आप लोगों ने हस्तमैथुन फिर शुरू कर दिया है तभी आप सबमें वो पुरानी शक्ति नहीं रही.....
एक बारी बगैर हस्थमैथुन किये झपाटे जी से लड़िए ,तब शायद आप भी थोडा बहुत कमाल कर सकें और हाँ अगली बारी अगर हस्थमैथुन करना ही पड़े तो किसी ऐसी जगह करिये जहाँ आपकी बहन को पता ना चले .........बेचारी रोज रात को मुझे यही सब बताती है आपके बारे में ...........ही ही ही


so next time be careful in choosing your place for masterbation, best of luck

:) :) :) :) :) :) :)

किलर झपाटा ने कहा…

पुराने पीड़ीत जी,
आपका धन्यवाद है। मगर डॉक्टर साहब वगैरह अब मेरे मित्र हुए, इसलिये उन्हें अब कुछ न कहें। यार मेरा उद्देश्य और कुछ नहीं बस यही कि ब्लॉगिंग सिर्फ़ अभिव्यक्ति हो। क्रोधावेश और भावावेश के अधीन होकर वातवरण को आक्मरोशित कर देना और उतरोत्तर मलिन कर देना भड़ास या भड़ास का उद्देश्य नही है और होना भी नहीं चाहिये। अपनी उचित बात को दूसरे के दिल तक इस तरह पहुँचाना कि वह चिंतन मनन को मजबूर हो जाये, वह सही भड़ास है। ये भड़ास को मेरा संदेश या उपदेश नहीं अनुग्रह है। जो हो थोड़ा सोच कर हो बस इतना ही परिवर्तन तो बहुत बड़े आंदोलन में परिवर्तित हो जायेगा। ये अंतर्जाल हमें बहुत बड़े आशीर्वाद स्वरूप प्राप्त हुआ है। विश्वबंधुत्व के लिये इसे बखूबी इस्तेमाल कर डालें। गालीगलौज, लड़ाई झगड़े तो हम रोज करते ही रहते हैं अपने आसपास। यहाँ क्यों ?
यह शब्द-युद्ध, शब्द का महत्व प्रकाशित कर गया।

जानी लीवर ने कहा…

यार कौन हो भई समने आ जाओ

किलर झपाटा ने कहा…

ओय क्न्फ़ुयूज़ेआज़म महाचूतिया झोलाछाप ढक्कन रुप्पू i.e. पागले के पाजामे।
मैं किल्ली तो आप बगई। आगे समाचार ये है कि आपकी खुजाल को देखते हुए मैनें अपनी दोस्टी की पेशकश वापस ली। झोलू मुझसे भारी गलती हुई कि एक महाचूतिये को ये पेशकश कर बैठा। क्योकि मुझे लगा कि शायद मैंने किसी का दिल दुखा दिया। पर दो दिन में ही मुझे अब अहसास हो रहा है कि इनके दिल की जगह भी तशरीफ़ ही हैं तो बड़ा रंज हुआ कि जिनका खून गुदाद्वार द्वारा स्वच्छ होता हो वे....... हा हा। अब लड़ ही लें रुप्पू अच्छे से। आप सब उसी बाप की पैदाइश हैं जो आपकी वल्दियत पे लिखी हैं (मुझे तो भारी शंका है एंड आय एम श्योर कि आप लोगों वल्दियत बोगस है) तो अपने अस्थिसंधान की फिर से तैयारी कर लें। (कई बार ये औषधि ले चुके हो इसका मतलब ही है कि अपनी वाहियात हरकतों से पिटे भी कई बार हो हा हा) तुम और तुम्हारी पलटन सबके सब वैश्या कैसे हो सकते हैं ? उसके लिये तो महिला होना आवश्यक है, मगर तुम सब तो शिखण्डी हो ना ? अपने नर मादा के चश्में का नम्बर तो पहले ठीक कर लो बुढऊ, इन मोतियाबिन्द वाली आँखों से कलाजंग, मुल्तानी का मुकाबला क्या होगा ? हा हा। मुझसे मुलाकात करने की इतनी जल्दी क्या है बच्चे ? क्या मुझपर मिसमिसाहट ज्यादा हो रही है ? वैसे तुम्हे खुद बतलाने की जरूरत नहीं है कि तुम एक महाचूतिया हो क्यूंकि तुम्हारे लक्षणॊं से ही जाहिर है।
मेरी तो कनमुर्री का ही इलाज है नहीं तुम्हारे झोले में हड्डियों का सिंगार करोगे क्या खाक? द ग्रेट महाचूतिया डॉ. रूपेश झोलाछाप छी बास्टर्ड सॉरी शायद कुछ और सरनेम था। जाने दो चूतियूं को क्या फ़र्क पड़ता है ? एम आय रॉंग ? हा हा

रूपेश की अम्मा की गाँड़ में हाथी का लंड ने कहा…

अबे झपाटे मैने तो तुझसे पहले ही कहा था कि ये हिंजड़ा रूपेश किसी काम का नहीं है सिर्फ़ सुबह शाम ज़ील की चूत में मुँह डालकर चूसने के इस भोस्ड़ी वाले को आता क्या है पर तू इसे दोस्त बना बैठा। ले अब भुगत। मेरी सलाह तो ये है कि तू अब इसके पीछे ही पड़ जा सब काम छोड़कर और जब तक किसी पागल साँड़ से इसकी गॉंड़ फड़वा न दो पिंड ना छोड़ो इसका ओ.के.।

डा.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) ने कहा…

बहन किल्ली झपाटिन, तुम्हारी हालत दोबारा बिगड़ गयी है। तुम मुखौटे के अलावा सारे कपड़े उतार कर नंगई करे पड़ी हो और बुरी तरह परेशान और भ्रमित हो कभी भड़ासियों से मित्रता करना चाहती हो कभी रिसिया खिसिया जाती हो, कभी मुझे बुढ़ऊ कहती हो कभी बच्चा कहती हो। दोस्टी करना चाहती थीं या दोस्ती, लटपटाने लगी हो अब तो लिखने में भी; बौखलाहट का ये आलम है कि अपने पिताजी श्री झपाटा जी की वल्दियत की तर्ज़ पर हमारी वल्दियत पर कुरकुरा रही हो। अस्थिसंधान रस तो तुम्हारे लिये तैयार है तो कब आ रही हो मनीषा दीदी से लड़ने के लिये? मैं तो आप पर लात नहीं उठाउंगा ये सारी तैयारी तो मनीषा दीदी की है बहन किल्ली, ये तो बहनों की पटका पटकी होगी मैं तो अस्पताल में आ जाउंगा तमाम भड़ासियों के साथ आपसे हाथ मिलाने। खुद को मर्द सिद्ध करने के लिये तुम जितनी परेशानी उठा रही हो मैं समझता हूँ कि बीमारी ही ऐसी है तुम्हारी।
तुमने अपने मुखौटे के प्रति तो चिंता बता दी क्या आपके पिताजी श्री झपाटा जी के बारे में भी चिंता है या वे सचमुच असल वालिद नहीं हैं आपके?
आपकी संस्कृति में भाई बहन के आपसी बलात्कार का नतीजा तो नहीं हैं आप? वैसे आपकी संस्कृति में तो बहनों को वेश्या बना लेतीं हैं आप और न जाने क्या क्या होता होगा आप सामने आतीं तो आपकी इस आदिम सभ्यता के बारे में अधिक जान पाते कि भाई बहन के अलावा और किन किन रिश्तों में आपके यहाँ बलात्कार की सम्मति है।
जय जय भड़ास

मुनेन्द्र सोनी ने कहा…

चलो अच्छा है कि तुमने अपना शौक जाहिर कर दिया वो तो हम पूरा कर देंगे लेकिन इसमें अपनी माताजी और डॉ.रूपेश जी को शामिल करने की आवश्यकता नहीं थी। तुम वेश्या हो तुम कुछ भी नीचता कर सकती हो। थू है तुम पर

बेनामी ने कहा…

You need a big fuck with elephant...
ha ha

किलर झपाटा ने कहा…

हैलो रुप्पू,
i.e. झोलाछाप सैक्स ब्लाईंड।
मेरी नहीं अपनी हालत की बात करो जो अब कभी भी नहीं सुधरेगी। यू पागल के पाजामें। मेरे मुखौटे से कितना जल रहे हो तुम लोग। हा हा। जब तुम सब खुद कहते हो कि घोषित तौर पर नंगे हो तो मेरी नंगई से क्यूँ विचलित हुए जाते हो ?
मैं और बुरी तरह परेशान और भ्रमित ? हा हा
अरे तुम बोगस भड़ासियों से काहे की मित्रता ?
मेरी मार खा कर तुम रो रहे थे सो जरा पुचकार दिया था इसका मतलब मित्रता होता है क्या? गधऊ कहीं के। अरे बूढे बारे एक बराबर कहावत नहीं सुनी क्या ? मुझे कह रहे हो और बौखलाये खुद हो तभी तो ९ तारीख से १६ तारीख तक पूरे हफ़्ते भर एलोपैथी अस्पताल में वैंटिलेटर की हवा खाने के बाद थोड़ी बहुत एनर्जी लेकर लिख पा रहे हो हा हा हगड़गंडे कहीं के। तुम्हारी वल्दियत पर मैं क्यूँ कुरकुराऊँगा। वो तो तुम्हारे वालिद साहब मुझे स्टेशन स्टेशन भीख माँगते मिल गये थे। मैंने पूछा क्या बात है रुप्पू के पापा आप का यह हाल ? कहने लगे क्या बताऊँ झपाटे, मैंने तो लड़का पैदा करने की कोशिश की थी ये साला शिखंडी निकल गया और मैं इस झोलाछाप के चक्कर में खुद कटोरे पर आ गया।
शेम शेम रुप्पू हिजड़े।

जैसे हिजड़े लोग घरोंघर नाचने गाने के बहाने छोटे बच्चों को चैक करने जाते हैं कि लड़का है लड़की है या तेरी भाषा में लैंगिक विकलांग ? वैसी ही तेरी आदत पड़ी है। और लोगों ने तेरे को कुछ नहीं कहा पर मैंने पीट दिया है सो भिदरयाता फिर रहा है यहाँ वहाँ। हा हा।

अस्थिसंधान रस तो मेरे लिये तैयार करके मनीषा हिजड़े से लड़ने के लिये बुला रहे हो ? इसीलिये तो महाचूतिया कहलाते हो।
शब्दों से तो लड़ लो पहले। मुझपे लात नहीं उठाउंगा कह रहे हो, वो तो मुझे भी मालूम है कि दोनों टाँगे मैंने ही तो तोड़ी हैं और तीसरी है ही नहीं हा हा। हिला तो पाते नहीं उठाओगे क्या खाक ? क्या यार रुप्पू शिखंडियों का उठता भी है कभी ? बुद्धू कहीं के।
हिजड़े से मुझ पहलवान की पटका पटकी करवायेंगे ये। महाचूतिया।

मुझे कह रहे हो "खुद को मर्द सिद्ध करने के लिये तुम जितनी परेशानी उठा रही हो"
हा हा तुम तो न अपने को मर्द सिद्ध कर पाये न अपने को औरत और ना ही डॉक्टर, यू झोलू।

और ये भाई-बहन के आपसी बलात्कार की बात और अन्य रिश्तों से बलात्कार की बात बार मुझसे क्यों पूछ रहे हो ? करवाना चाहते हो क्या तुम्हारे किसी रिश्तेदार का बलात्कार! हा हा।

यू शिखंडी महाचूतिये, बार बार मुझे "मुम्बई आ जा, मिल ले, सामने आ जा, मुखौटा निकाल दे, मेरे हिंजड़ों से पटका पट्की करले" करते रहते हो, इसी से तुम्हारी बौखलाहट समझ में आ रही है हा हा।
ओय खिसियानी बिलैया, नोंचते रहो मुम्बई का खम्बा खम्बा।
यू वोंट गैट मी एट ऑल।

किलर झपाटा ने कहा…

प्रिय मुन्नू (मुनेन्द्र) तुम तो मुझे पहले सूअर कहते थे ! अब ओपीनियन बदल गई तुम्हारी ? पहलवान को वैश्या कहते हुए शर्म नहीं आती। ये ही सिखाया है तुम्हारे माँ-बाप ने कि पहलवान को वैश्या कहो और फिर उससे मार खा कर हाथ पैर तुड़वा बैठो। कॉमन सैंस भी नहीं है यार तुममें स्पिटिंग सैंस क्या होगा खाक ? हा हा।

डा.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) ने कहा…

जब मेरी गाँड़ में नहीं था गूदा, तो मैं कुश्ती लड़ने क्यों कूदा ? हाय
अब झपाटा पटक पटक कर मेरी गाँड़ मार रहा है तो मैं बिलबिला रहा हूँ । ब्लॉगिंग में अब मैं सिर्फ़ झपाटे के बारे में लिखूंगा और सपने में चौंक कर उठ जाया करता हूँ क्योंकि किलर झपाटे ने मेरे पिछवाड़े को तालाब जो बना दिया है। मेरे पिताजी छीबास्टर्ड साहब ने मना भी करा था लेकिन अब मराई है तो भुगतना तो पड़ेगा ही । हँसी नहीं आ रही है अगर हँसने की कोशिश करता हूँ तो पीछे हुई बवासीर में दर्द होने लगता है। आह आह!

डा.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) ने कहा…

जब मेरी गाँड़ में नहीं था गूदा, तो मैं कुश्ती लड़ने क्यों कूदा ? हाय
अब झपाटा पटक पटक कर मेरी गाँड़ मार रहा है तो मैं बिलबिला रहा हूँ । ब्लॉगिंग में अब मैं सिर्फ़ झपाटे के बारे में लिखूंगा और सपने में चौंक कर उठ जाया करता हूँ क्योंकि किलर झपाटे ने मेरे पिछवाड़े को तालाब जो बना दिया है। मेरे पिताजी छीबास्टर्ड साहब ने मना भी करा था लेकिन अब मराई है तो भुगतना तो पड़ेगा ही । हँसी नहीं आ रही है अगर हँसने की कोशिश करता हूँ तो पीछे हुई बवासीर में दर्द होने लगता है। आह आह!

बेनामी ने कहा…

अबे डाक्टर रूपेश अब तू क्यों बार बार झपाटा भैया से अपनी मॉम को चुदवा चुदवा के उसकी चूत का भोसड़ा बनवाये दे रहा है गाँडू। तेरी फ़ोटो से ही लग रहा है झड़े हुये, कि झपाटा भाई ने तेरे हाथ के लिगामेंट रप्चर कर डाले है तभी तो कलाई पकड़े बैठा है।

किलर झपाटे की फ़र्जी प्रोफ़ाइल ने कहा…

रूपेश की गाँड़ जल्दी ही फटने वाली है दोस्तों आप लोग दूर दूर हो जाओ क्योंकि बहुत सारी कब्जियत भरी गंदी बास वाली टट्टी छितरेगी चारों तरफ़ जिसे ये और इसके शिखंडी दोस्त पुनि पुनि खाकर पार्टी करेंगे।

किलर झपाटे की फ़र्जी प्रोफ़ाइल ने कहा…

इसकी बऊ भी चुदेगी पब्लिक में आप लोग तैयार रहो।

डा.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) ने कहा…

क्या बात है मुंबई आने में डरते हो?यदि सचमुच इतनी ताकत है कि मेरे सामने खड़े भी हो सको तो शेष बची उम्र तुम जैसे चिरकुट की गुलामी में बिताउंगा। ये बात सिर्फ़ तुम तक पहुंचानी है इसलिये कमेंट बॉक्स में लिख रहा हूँ। तुम्हारे आगे पीछे रिश्तेदारों के नाम पर जो भी हों उन्हें बता कर आना और अपने घर का पता भी जेब में लिख कर रख लेना वरना दोनो टाँगों को बीच में से चीर कर दोनो हिस्से किस पते पर भेजना है ये पुलिस को तलाशना मुश्किल होगा। मुंबई आने से डरते हो तो पूरे भारत में जहाँ तुम खुद को पहलवान मान सको उस जगह आकर ये पुण्यकर्म कर सकता हूँ तुम्हें पता चल जाएगा कि जो लिख रहा हूँ वो कर भी सकता हूँ।
लेकिन ये क्या तुमने कमेंट मॉडरेशन किस डर से लगा रखा है?

सानिया मिर्ज़ा ने कहा…

झपाटा भैया, बहुत दिन हुए आपने कुछ लिखा नहीं. हम रोज आते हैं और निराश चले जाते हैं.

बेनामी ने कहा…

किलर भाई को बार बार मुम्बई क्यों बुलाता रहता है बे रुप्पू महाचूतिये। कित्ती गाँड़ मराएगा बे उनसे ? तेरी हिम्मत है लौड़े हाँगकाँग जाने की तो तू ही चला जा ना। जब देखो तब मंच पर खुलेआम घोषणा रहता है खसुआ कहीं का। तू अपने को बड़ा तीस मार खाँ समझता है बे दो कौड़ी के झोले ? जो तुझ जैसे चूहे से मिलने इतना बड़ा पहलवान आयेगा।

डॉ रूपेश श्रीवास्तव की माँ चुद गई है - ने कहा…

अबे फटी हुई चुत की पैदाइश रूपेश , बहनचोद तू किलर झपटा से तो पूछ रहा है की comment moderation की क्यों लगा रखा है ,हरामी के पिल्लै तू ये बता की तुने भडास पर comment moderation क्या अपनी माँ चुदने से बचने के लिए लगा रखा है ? पह्ले३ अपनी गांड पर हाथ फिर फिर दूसरों की गांड धोने की सोच ...;)

सानिया मिर्ज़ा ने कहा…

झपाटा भैया, आप भड़ासियों की ऐसी-तैसी करके कहाँ चले गए? ओलिम्पिक की तैयारी में जुट गए क्या? गोल्ड मेडल लेकर आना. मैं भी प्रैक्टिस कर रही हूँ. मैं डायमंड मेडल जीतूंगी इस बार.